✍️✍️ 107/116/151 वाद को कचहरी पर पुनः सुनवाई हेतू बार ने की वार्तालाप



वाराणसी: सीआरपीसी की धारा 107/116/151 के वादों का निस्तारण सिर्फ मुख्यालय पर, एक ही स्थान पर हो, मांग को लेकर आज दी बनारस बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अवधेश कुमार सिंह के नेतृत्व में दोनों बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों एवं वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ आज एक प्रतिनिधि मंडल वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस आयुक्त अशोक मुथा जैन से मुलाकात किया। प्रस्तावक अविनाश श्रीवास्तव व अन्य सैकड़ो अधिवक्ताओ द्वारा हस्ताक्षरित पत्र को बार के कवरिंग पत्र के साथ दिया एव उक्त संबंध मे अविलंभ कार्यवाही करने हेतु वार्तालाप किया। वार्तालाप के दौरान पुलिस कमिश्नर ने कुछ समय का वक्त मांगा और 26 फरवरी तक उत्तर देने का आश्वासन दिया। 
👉मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल में सेन्ट्रल बार एसोसिएशन महामंत्री सुरेन्द्र नाथ पांडेय, पूर्व महामंत्री शशीकांत दूबे , बनारस बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश कुमार श्रीवास्तव, रमाकांत कुशवाहा, विवेक मिश्रा, गौतम कुमार सिंह, अजिताभ सिंह, सतीश यादव, दीपक चौरसिया, संजय लालवानी, दिनेश दीक्षित सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल रहे। 

👉इस अवसर पर दी बनारस बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अवधेश कुमार सिंह ने पुलिस कमिश्नर को बातचीत के दौरान बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जनहित की सुविधा को देखते हुए पुलिस कमिश्नरेट की व्यवस्था वाराणसी में लागू की गई इसके पश्चात पुलिस कमिश्नरेट के अधिकार क्षेत्र में प्रशासनिक स्तर पर अधिकार प्रदान किए गए जिसके अंतर्गत धारा 107/116/151 सीआरपीसी व अन्य न्यायिक अधिकार प्रदान किए गए परंतु अत्यंत दुख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी द्वारा नागरिक व अधिवक्ताओं की सुविधा को दर किनार कर उपरोक्त धारा एवं कार्यवाही हेतु वाराणसी जिले के मुख्यालय से न करा कर अलग अलग एवं दूर दराज क्षेत्रों में खोले गये नये कार्यालयों एवं न्यायालय स्थापित कर कार्यवाही के लिए भेजा जा रहा है।जिसकी वजह से अधिवक्ताओ एवं आम नागरिकों के लिए बड़ी समस्या उत्पन्न हो गयी है। जबकि उन स्थानों पर वादों में उपयोग होने वाली वकालतनामा एवं नोटरी, शपथपत्र, कोर्ट टिकट आदि कई कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं है और अधिवक्ताओ को ऐसे वादों की पैरवी के लिए अपने दीवानी एवं कलेक्ट्रेट न्यायालय की पैरवी को छोड़कर, दूर दराज में खोले गए ऐसे न्यायालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है। ये अधिकांश न्यायालय मुख्यालय के बीस पच्चीस किलोमीटर दूर है। जो शहर में है उन न्यायालयो में भी पहुंचने के लिए जाम का सामना करना पड़ जाता है। इस लिए सभी न्यायालय मुख्यालय में एक ही स्थान पर होना सभी के लिए सुविधाजनक होगी।







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