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✍️✍️ भाई की हत्या मामले में दोषी करार, कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा

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वाराणसी के अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (एफटीसी-प्रथम) ने एक सनसनीखेज हत्या मामले में आरोपी सीताराम पासवान को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी पर ₹15,000 का अर्थदंड भी लगाया है। क्या है पूरा मामला? 👉अभियोजन के अनुसार,  घटना 2 अप्रैल 2019 की है। बसंतपुर (बक्सर) निवासी राज किशोर पासवान ने चौबेपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायत में बताया गया था कि घटना वाले दिन सुबह करीब 9 बजे, राज किशोर अपने भाई नन्द किशोर के साथ ग्राम मढ़नी (चौबेपुर) स्थित ईंट भट्ठे पर काम कर रहे थे। उसी भट्ठे पर आरोपी सीताराम पासवान भी कार्यरत था।पुरानी किसी बात को लेकर भट्ठे पर ही सीताराम और नन्द किशोर के बीच कहासुनी हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि आरोपी सीताराम ने आपा खो दिया और नन्द किशोर की गर्दन पर फरसे से जोरदार प्रहार कर दिया। हमला इतना घातक था कि नन्द किशोर की गर्दन धड़ से अलग हो गई और मौके पर ही उसकी दर्दनाक मृत्यु हो गई। 👉 बता दे कि घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था, जिसे पुलिस ने विवेचना के दौरान अगले ही दिन गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 👉तहरीर के आधार   पर थान...

✍️✍️ साड़ी कारोबारी दोषमुक्त, 26 साल पुराना धोखाधड़ी का मामला

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  वाराणसी। बैंक से धोखाधड़ी कर हजारों रुपए निकालने के 26 साल पुराने मामले में आरोपित साड़ी कारोबारी को कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (तृतीय) अजय प्रताप की अदालत ने लाहौरी टोला, सिगरा निवासी आरोपित राजकुमार कपूर को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।  अदालत में ""बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव, नरेश यादव व संदीप यादव ने पक्ष रखा"" 👉 अभियोजन पक्ष के अनुसार भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य प्रबन्धक, लेखा व प्रशासन वादी मुकदमा राम शरण श्रीवास्तव ने 10 मार्च 2000 को दशाश्वमेध थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि लोहारी टोला स्थित राज सिल्क इण्डस्ट्रीज के पार्टनर राज कुमार कपूर व जयनाथ मिश्रा ने बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से उसकी परवलपुर शाखा (विहार) से चुराया गया कोष ड्राफ्ट संख्या-ओ.एल.000034/6796, जो वास्तव में उसकी उपरोक्त शाखा (बांकाघाट) से निर्गमित नहीं है। इस ड्राफ्ट को उपरोक्त फर्म द्वारा जो उनके पक्ष में है, बैंक आफ बड़ौदा, गोदौलिया शाखा में समाशोधन के माध्यम से संग्रहण के लिए जमा...

✍️✍️ दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग के आरोपी को मिली जमानत

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वाराणसी। स्थानीय जनपद न्यायालय ने दुष्कर्म और आपत्तिजनक फोटो वायरल करने की धमकी देने के आरोपी मंजीत यादव उर्फ रामू को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम) कुलदीप सिंह-II की अदालत ने मामले के तथ्यों को देखते हुए यह फैसला सुनाया। बता दे कि अदालत में ""बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता शशिकांत दुबे व सहयोगी अधिवक्ता आलोक सौरभ पाण्डेय, अंकित दुबे एवं संदीप यादव ने पक्ष रखा"" 👉 अभियोजन के अनुसार, पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने उसकी अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और जेवरात की भी मांग की।  जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि पीड़िता के बयानों में काफी विरोधाभास है और घटना की एफआईआर काफी देरी से दर्ज कराई गई।  अदालत ने ₹1,00,000 के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि की जमानत पर आरोपी को रिहा करने का आदेश देते हुए कई शर्तें भी लगाई हैं, जिसमें साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करना और विवेचना में सहयोग करना शामिल है।

✍️✍️ दिनदहाड़े घर में घुस कर चोरी , गाली- गलौज जान से मारने व मरवाने व बम से उड़ा देने की धमकी देने का संगीन आरोप, थाना लोहता को FIR दर्ज करने का आदेश

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वाराणसी के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वर्तिका शुभानंद ने एक गंभीर चोरी के मामले में थाना लोहता पुलिस को प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने का निर्देश दिया है। यह आदेश आवेदक द्वारा दायर प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद दिया गया। ""बता दे कि पीड़ित ने धारा 173(4) के अंतर्गत प्रार्थना पत्र अपने फौजदारी अधिवक्ता देवऋषी सिंह, संदीप कुमार व उत्कर्ष चैटर्जी के जरिए माननीय न्यायालय में दाखिल किया था"" 👉 मामले के अनुसार , प्रार्थी ने आरोप लगाया कि उसके घर में योजनाबद्ध तरीके से चोरी की घटनाएं हुईं, जिसमें नगदी, आभूषण, कपड़े सहित अन्य कीमती सामान चोरी कर लिया गया। प्रार्थी के अनुसार, आरोपी पहले से उसके घर की गतिविधियों पर नजर रखता था और मौके का फायदा उठाकर वारदात को अंजाम देता रहा।         घटना के बाद प्रार्थी ने थाना लोहता में शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि पुलिस द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद प्रार्थी ने न्यायालय की शरण ली और धारा 173(4) के अंतर्गत प्रार्थना पत्र दाखिल किया।           न्यायालय ने मामले की ...

✍️✍️ बनारस: चंदापुर नरसंहार के दोषी को फांसी की सजा, एक ही परिवार के चार लोगों की रोंद डाली थी दुनिया

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वाराणसी। जनपद के चोलापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चंदापुर में 11 साल पहले हुए रोंगटे खड़े कर देने वाले चौहरे हत्याकांड में अदालत ने अपना कड़ा फैसला सुना दिया है। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम/यू.पी.एस.ई.बी.) विनोद कुमार-VI की अदालत ने अभियुक्त रविंद्र उर्फ राजू पटेल को चार लोगों की नृशंस हत्या का दोषी मानते हुए मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है। बता दे कि ""अभियोजन की ओर से रोहित मौर्य [सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) वाराणसी] व वादी के वरिष्ठ अधिवक्ता बटुक नाथ मौर्य , रितेश मौर्य एवं सुधांशु गुप्ता ने पैरवी किया"" ​ लोहे के रम्भे से किया था प्रहार ​अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 29 अक्टूबर 2013 की रात करीब 9:30 बजे की है। मृतक मोहन जायसवाल अपने परिवार के साथ चंदापुर स्थित मकान में रह रहे थे। रात के समय जब मोहन जायसवाल आंगन में गए, तभी गांव के ही रविंद्र उर्फ राजू पटेल ने उन पर लोहे के रम्भे (राड) से हमला कर दिया। बचाव के लिए आए उनके बेटे संदीप, पत्नी झूना देवी, बेटे प्रदीप उर्फ गोलू और बेटी पूजा पर भी राजू ने एक के बाद एक प्राणघातक प्रहार किए। हम...

✍️✍️ प्रॉपर्टी विवाद और धोखाधड़ी के आरोपी को कोर्ट से मिली राहत

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वाराणसी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार की अदालत ने थाना कैंट से जुड़े एक गंभीर आपराधिक मामले में आरोपी बहाजुल हक उर्फ शेरू को राहत देते हुए जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने आरोपी को 20,000 रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान धनराशि की प्रतिभूति (Security) जमा करने पर रिहाई की मंजूरी दी। क्या है पूरा मामला? यह विवाद एक मकान की खरीद-बिक्री और उसके बाद हुए कथित फर्जीवाड़े से जुड़ा है। वादिनी बेबी नाज का आरोप था कि उन्होंने रईशा बेगम से वाराणसी के चमरौटिया महाल स्थित एक मकान खरीदा था। आरोप है कि बाद में रईशा बेगम ने विपक्षी बहाजुल हक उर्फ शेरू के साथ मिलकर साजिश रची और एक फर्जी 'रजिस्टर्ड सट्टा' तैयार कर लिया। 👉 वादिनी के अनुसार, 1 दिसंबर 2015 की रात को आरोपियों ने उनके घर में घुसकर हमला किया, मारपीट की और जान से मारने की धमकी देते हुए मकान पर अवैध कब्जा करने का प्रयास किया।

✍️✍️ पत्नी को एक माह के भीतर ससुराल लौटने और वैवाहिक दायित्व निभाने का निर्देश

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वाराणसी। स्थानीय परिवार न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पत्नी को एक महीने के भीतर अपने पति के घर वापस लौटने और दांपत्य जीवन के कर्तव्यों का पालन करने का आदेश दिया है। यह निर्णय 'हिंदू विवाह अधिनियम की धारा-9' (दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना) के तहत एकपक्षीय सुनवाई के बाद लिया गया। बता दे की पति की ओर से इस मामले की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता राम दुलार प्रजापति द्वारा किया गया। मामला क्या था? न्यायालय में प्रस्तुत वाद के अनुसार, दोनों पक्षों का विवाह नवंबर 2014 में हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुआ था। वैवाहिक जीवन के शुरुआती वर्षों के बाद, पति का आरोप था कि उसकी पत्नी बिना किसी उचित कारण के उसे प्रताड़ित करने लगी और जनवरी 2016 में अपने मायके चली गई। पति ने दावा किया कि उसने कई बार पंचायत और सामाजिक स्तर पर पत्नी को वापस लाने का प्रयास किया, लेकिन वह वापस आने को तैयार नहीं हुई।   अदालती नोटिस के बावजूद पत्नी उपस्थित नहीं हुई, जिसके कारण मामले की सुनवाई एकपक्षीय (Ex-parte) की गई। न्यायालय ने साक्ष्यों और हलफनामों के आधार पर पति के पक्ष में डिक्री पारित की। अदालत ने पत्नी को...