👉 बता दे की पीड़ित द्वारा माननीय न्यायालय के समक्ष प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा 156(3) वरिष्ठ अधिवक्ता संजय साहनी व सहयोगी अधिवक्ता अखिलेश कुमार, शिव कुमार निषाद के जरिए दाखिल किया गया था। कथन में कहा गया कि अभियुक्ता पूनम सिंह व उसके पति मिथिलेश सिंह भूमाफिया किस्म के व्यक्ति है। गरीबी व असहाय व्यक्तियों को डरा व धमका कर कम दामो में जमीन खरीदकर उचित दामो में बेचना इनका मुख्य व्यवसाय है। अभियुक्ता पूनम सिंह के पति ने आवेदक को फिरौती के रूप में एक लाख रूपया का मांग किया और कहा कि यह बात किसी को पता नहीं चलना चाहिए। उसने व उसके पुत्र ने एक लाख रूपया जरिये यूटीआर ट्रांसफर किया जिसके सन्दर्भ में एक आपसी इकरारनामा फर्जी तैयार कर आवेदक व शिवप्रसाद सिंह को डरा धमका कर हस्ताक्षर कराया । विभिन्न दिनांकों में कुल 164000 रुपया विपक्ष ने आवेदक से मांग किया, जबरजस्ती अभियुक्तगण व उसके परिवार वाले को यह धमकी देते थे कि उक्त बात थाने पर पता नहीं चलना चाहिए यदि उक्त बात पता चला तो पूरे परिवार को जान से हाथ धोना पड़ेगा। अभियुक्ता व उनके पति मिथिलेश सिंह उसके व उसके परिवार के मजबूरी का फायदा उठाकर पुनः दिनांक-07.06.2021 को चार-पांच व्यक्तियो को लेकर उसके दरवाजे पर आये घर में घुसकर मां बहन की भद्दी-भद्दी गालियां देने लगे, पाच लाख नगद दो या तो हमारी पत्नी के खाता में ट्रांसफर करो मजबूरी वश उसने अभियुक्ता के खाते में उक्त तिथि को पांच लाख ट्रांसफर कर दिया।
वाराणसी: अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वर्तिका शूभानंद की अदालत ने पीड़ित वीरेंद्र प्रताप सिंह द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा 156(3) को स्वीकार करते हुए थानाध्यक्ष बड़ागांव को आदेशित किया कि प्रस्तुत प्रकरण में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर नियमानुसार विवेचना कर दो दिवस के अंदर प्रथम सूचना रिपोर्ट की प्रति न्यायालय में प्रेषित करें एवं मामले में नियमानुसार विवेचना कराए जाने के उपरांत धारा 173 दप्रस के अंतर्गत आख्या न्यायालय में प्रेषित करें।
