"" बचाव पक्ष की ओर से अदालत में अधिवक्ता श्रीकांत प्रजापति व संजय कुमार विश्वकर्मा ने पक्ष रखा ""
👉 अभियोजन कथानक संक्षेप में इस प्रकार है कि कार्यालय अधीक्षक कारागार, वाराणसी द्वारा इस आशय की तहरीर दी कि विचाराधीन बन्दी राजेश कुमार जायसवाल कारागार में निरूद्ध था। उक्त बन्दी को दिनांक 25.02.2022 को प्रातः तबियत खराब होने के कारण शिव प्रसाद गुप्त मण्डलीय चिकित्सायल, वाराणसी में उपचार हेतु भेजा गया था जहां उपचार के दौरान बन्दी की मृत्यु हो गयी। उक्त बन्दी के मृत्यु की सूचना पाते ही जेल में निरूद्ध शातिर बन्दी श्रवण यादव, संजय यादव, मुलायम यादव, प्रदीप यादव, पंकज यादव, सुजीत यादव व अंकित तिवारी द्वारा जोर जोर से चिल्लाते हुए बन्दियों को भड़काया जाने लगा कि उचित उपचार न होने के कारण बन्दी की मृत्यु हो गयी है। कारापाल बिरेन्द्र कुमार त्रिवेदी एवं उप जेलर अरविन्द कुमार सिन्हा द्वारा उन्हें समझाने का प्रयास किया गया, किन्तु उक्त बन्दी और उग्र होकर जोर जोर से चिल्लाने लगे। इनकी आवाज सुनकर चक्र संख्या-1 के गेट पर आकर हंगामा करने लगे तथा अड़गड़ा को जोर जोर से हिलाकर तोड़ने लगे। जेल अधीक्षक भी चक्र नंबर-1 पर पहुंच गये और समझाने का प्रयास किये किन्तु बन्दी आक्रामक तथा हमलावर होने लगे। कुछ अन्य उपद्रवी बन्दी जिनका उल्लेख तहरीर में है, कुछ अन्य अज्ञात बन्दियों के साथ अपने अहाते के गेट के ताले को तोड़कर चक्र में आ गये तथा चक्र में स्थित वी०सी० रूम में स्थापिल समस्त उपकरण-सी०सी०टी०वी० पी०सी०ओ० तथा एम्बुलेंस के शीशे तोड़ दिये, जिसमें कारण सरकारी सम्पत्ति की क्षति हुई तथा जेल में अनुशासन की व्यवस्था भंग हुई। वादी मुकदमा की तहरीर के आधार पर सम्बन्धित थाने पर दिनांक 26.02.2022 को समय 01.28 बजे धारा 147, 353, 120b, 3/4 सार्वजनिक सम्पत्ति नुकसान निवारण अधिनियम व 7 क्रिमिनल लॉ एमेण्टमेन्ट एक्ट व 45 कारागार अधिनिस्त के अन्तर्गत आवेदक/अभियुक्त व अन्य के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत किया गया।


