✍️✍️ Culpable homicide case: Accused granted bail

 


✍️✍️ गैर-इरादतन हत्या का मामला, आरोपी की जमानत मंजूर 

वाराणसी।

वाराणसी की अदालत ने आदमपुर थाना क्षेत्र में मारपीट, लूटपाट और गैर-इरादतन हत्या के एक मामले में पिछले साढ़े तीन साल से जेल में बंद मुख्य आरोपी मो. हमीद की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। अपर सत्र न्यायाधीश संध्या श्रीवास्तव की अदालत ने मामले के तथ्यों, परिस्थितियों और आरोपी की लंबी न्यायिक अभिरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया। अदालत ने आरोपी मो. हमीद को ₹1,00,000/- (एक लाख रुपये) का व्यक्तिगत बंधपत्र (पर्सनल बॉन्ड) और इतनी ही धनराशि के दो स्थानीय प्रतिभू (गारंटर) संबंधित मजिस्ट्रेट की संतुष्टि पर दाखिल करने पर रिहा करने का निर्देश दिया है।

""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता अजय गेठे ने पक्ष रखा""

क्या था पूरा मामला?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी अजीत यादव ने आदमपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि 20 नवंबर 2022 की सुबह करीब 3 से 4 बजे के बीच धनेरा चौराहे के पास कुछ अज्ञात लोग एक व्यक्ति की बेरहमी से पिटाई कर रहे थे। घायल व्यक्ति को कबीर चौरा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ अगले दिन 21 नवंबर 2022 को उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद पुलिस ने मामले को गैर-इरादतन हत्या (धारा 304) में तरमीम कर जांच शुरू की। पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर आरोपी मो. हमीद और उसके अन्य साथियों को 26 नवंबर 2022 को गिरफ्तार किया था।

बचाव पक्ष की दलीलें जो बनीं जमानत का आधार

आरोपी के विद्वान अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष मजबूत दलीलें पेश करते हुए कहा कि:

  •  सह-अभियुक्त हो चुके हैं दोषमुक्त: इस मामले के अन्य सह-अभियुक्तों (सोनू उर्फ मो. रफउत, फैजू उर्फ सीबू, और रियाज उर्फ लंबू) को अदालत पहले ही 12 अगस्त 2024 को अभियोजन की कहानी को अविश्वसनीय मानते हुए दोषमुक्त (बरी) कर चुकी है।
  •  लंबे समय से जेल में बंद: आरोपी मो. हमीद 26 नवंबर 2022 से लगातार जिला कारागार वाराणसी में बंद है।
  •  उम्र निर्धारण का विवाद: शुरुआत में विवेचक ने उसे बाल अपचारी माना था, लेकिन किशोर न्याय बोर्ड द्वारा उसे वयस्क घोषित किए जाने के बाद मामला नियमित अदालत में स्थानांतरित किया गया था।
  • दूसरे मामले में भी मिल चुकी है जमानत: आरोपी के खिलाफ थाना जैतपुरा में दर्ज एक अन्य मामले (धारा 302) में भी उसे पहले ही जमानत मिल चुकी है।

अदालत का फैसला

हालांकि, जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) ने आरोपी की जमानत का कड़ा विरोध किया और याचिका खारिज करने की मांग की थी। लेकिन अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी की लंबी जेल अवधि को आधार मानते हुए जमानत याचिका मंजूर कर ली। 


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