वाराणसी: विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्वनी कुमार प्रथम की अदालत ने पीड़ित अजय कुमार अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा 173(4) को स्वीकार कर परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया तथा पत्रावली वास्ते बयान अन्तर्गत धारा 223 BNSS दिनांक 28/01/2025 को प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
👉 बता दें कि पीड़ित अजय कुमार अग्रवाल ने अपने अधिवक्ता अक्षय द्विवेदी व अंकुर पटेल के जरिए अदालत में बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत कोर्ट में आवेदन दिया था। आरोप था कि प्रार्थी के पिता भवन संख्या सी.के. 59/48 ए मोहल्ला कर्णघंटा नीचीबाग के भूतल में स्थित एक दुकान लगभग 55 वर्ष पहले किराये पर लेकर जीविकोपार्जन करते थे । यह मकान बिरला चेरिटेबल ट्रस्ट की थी बाद में मेसर्स मनोरमा डेवलेपर्स एण्ड कन्सट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के मालिक केशव पसारी ने फर्जी ढंग से 2011 में बैनामा करा लिया। भवन स० सी० के० 59/48-ए जिस भूमि पर बना है यह भूमि नजूल की सम्पति है जो उत्तर-प्रदेश राज्य सरकार की सरकारी सम्पति है। जिसे साजिशन कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर विपक्षी सं०-1 द्वारा अपने नाम से रजिस्ट्री करायी गयी व नगर निगम वाराणसी में मिली भगत कर दाखिल खारिज भी करवा लिया गया है। इस नजूल की जमीन पर बिरला चेरिटेबल ट्रस्ट का लीज था जो 2004 ई० में समाप्त हो गया फिर भी मनोरमा डेवलपर्स एण्ड कन्सट्रक्सन कम्पनी के मालिक केशव पसांरी द्वारा फर्जी ढंग से 2011 ई० में बैनामा करा लिया गया जबकि दिनाक 14/08/2014 ई० को उपजिलाधिकारी वाराणसी द्वारा निर्देशित किया गया कि यह भूमि नजूल की है सरकारी भूमि है जिसका बैनामा नहीं हो सकता। उपरोक्त भवन में प्राथी के अलावा अन्य किरायदार श्रीमती शैल सिंह पत्नी पर्शुराम सिंह, राजेन्द्र यादव पुत्र स्व० हिरा लाल यादव, प्रदीप कुमार पुत्र स्व० प्रताप कुमार तथा कुसुमलता पत्नी केदार प्रसाद। प्रार्थी को लेकर चारों किरायेदार कुल 5 लोगों ने विपक्षी द्वारा 2011 में बैनामा कराने से पहले सन् 2007 में केदार प्रसाद बनाम बिरला चेरिटेबल ट्रस्ट मु०न०-48/2007 सिविल बाद माननीय न्यायालय सिविल जज जू०डि० पंचम वाराणसी में दाखिल किया गया था जो विचाराधीन है। माननीय न्यायालय द्वारा उक्त भवन को संरक्षित. सुरक्षित एवं बेदखली करने से रोकने के लिए स्थगन आदेश पारित किया गया जो दिनांक-16/10/2024 ई० तक प्रभावी है। इसके बावजूद विपक्षी द्वारा नगर निगम वाराणसी में कूटरचित दस्तावेज पेशकर व अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मिलाकर उपरोक्त भवन को जर्जर दिखाकर खाली कराने का आदेश पारित कराया व मकान को गिराने का आदेश पारित कराया। इस सम्बन्ध में नगर निगम वाराणसी द्वारा हम प्रार्थी के अलावा अन्य चारो दुकानदारों को बिना किसी सूचना दिये व सुने आदेश पारित कर दुकान खाली कराने के लिए चौक पुलिस को दिनांक 26/09/2024 ई० को मौके पर भेजा था। जब प्राथी के अधिवक्ता स्टे आर्डर व सिविल में चल रहे मुकदमें की जानकारी पुलिस को दिया और लिखित दिखाया तो पुलिस यह कहकर कि नगर निगम वाराणसी द्वारा धारा 334(3) के तहत उपरोक्त मकान को दिनांक- 25/09/2024 ई० तक खाली करने का आदेश दिया गया है यदि आप लोग खाली नही करोगे तो हम लोग जबरदस्ती खाली करवा देंगे। थाना पुलिस के यह कहने पर प्रार्थी व अन्य चारों दुकानदार मिलकर नगर निगम के मनमाने एक पक्षीय आदेश के खिलाफ माननीय हाईकोर्ट, प्रयागराज में दिनांक-30/05/2024 को सिविल मिसेलिनियस रिट दाखिल किया है जो विचाराधीन है। इस सबके बावजूद विपक्षी सं०1 ऐन केन प्रकेण उक्त भवन को हम प्राथी व अन्य चारो किरायेदारों से दुकानें खाली करवाने के प्रयास में लगा है इसी के तहत साजिशन थाना हल्का चौक को मिलाकर दिनांक 01/10/2024 को सोनू पाण्डे उर्फ शिवम पाण्डेय विपक्षी सं0-2 व एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के साथ उक्त मकान को गिराया जा रहा था जबकि उक्त भवन में एक 85 वर्ष की वृद्ध महिला रहती है उसके मना करने के बावजूद तोडफोड की जा रही थी जब हम प्रार्थीगण को सूचना मिली तो मौके पर पहुंचे तो उक्त लोग मारपीट पर आमादा हो गये इस पर प्राथीगण ने डायल 112 पर फोन कर पुलिस को बुलाया जब पुलिस अन्दर गयी तो विपक्षी सं0-1,2 के अलावा एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा 10 बजे सुबह मकान को तोड़ा जा रहा था. 112 की पुलिस ने सभी को थाना चौक पुलिस को सौंपकर चले गये। विपक्षी स०-1 अपने प्रभाव में पुलिस को लेते हुये अपने अलावा दोनो व्यक्तियों को बिना कार्यवाही किये हुए ही छुड़वा लिया। प्रार्थी इससे घबडाकर नगर निगम वाराणसी, डी०एम०, कमिश्नर, उपजिलाधिकारी सभी जगह लिखित रूप से स्थगन के बाद भी ऐसे कृत्य के लिए सूचना दिया। प्रार्थी ने जब यह देखा कि थाना चौक पुलिस द्वारा विपक्षीयों के खिलाफ कोई कार्यवाही नही की जा रही है तब दिनांक-03/10/2024 ई0 को एक
लिखित प्रार्थना पत्र श्रीमान् पुलिस आयुक्त महोदय वाराणसी जरिए रजिस्टर्ड डाक द्वारा सभी दुकानदारों के हस्ताक्षर के साथ दिया बावजूद इसके विपक्षीगणों के खिलाफ कोई भी कार्यवाही नहीं की गई। इससे पहले दिनांक 25/07/2024 ई० को पुलिस आयुक्त महोदय को एक प्रार्थना पत्र दिया गया था जिस पर आयुक्त द्वारा एस.एच.ओ ० चौक को यह निर्देशित किया गया था कि उन मामले में स्थगन आदेश दिनांक- 16/10/2024 तक है जो दिनांक 06/02/2007 से लागू है बावजूद इसके थाना चौक द्वारा प्राथी व अन्य दुकानदारों पर लगातार यह दबाव बनाया जा रहा है कि जल्द से जल्द दुकान खाली कर दो। माननीय न्यायालय द्वारा निष्पक्षतापूर्वक जांच का आदेश पारित किया जाता है तो उक्त प्रकरण में स्थानीय थाने के अलावा नगर निगम वाराणसी के कई अधिकारी व कर्मचारी आरोपित हो सकते है क्यूंकि 2007 स्थगन आदेश के बादजूद साजिशन उक्त भवन को गिराने खाली कराने आदेश पारित किया गया व मुकदमें के दौरान तथ्य छिपाकर गलत ढंग बैनामा भी कराया गया जबकि उपजिलाधिकारी द्वारा उक्त भवन की जमीन नजूल (सरकारी) जमीन बताया गया है।
