वाराणसी:
जिले के रामनगर थाना क्षेत्र के सुल्तानपुर गांव में पानी की पाइप बिछाने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद एक बड़े बवाल में बदल गया। मामले को सुलझाने पहुंची पुलिस टीम पर ग्रामीणों की भीड़ ने लाठी-डंडों और ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए और सरकारी वाहनों को भारी नुकसान पहुँचा।
क्या है पूरा मामला?
👉 न्यायालय के दस्तावेजों के अनुसार, घटना की शुरुआत तब हुई जब सुल्तानपुर गांव में वादिनी रितु देवी के घर के पास पानी की पाइप को लेकर मारपीट हो रही थी। सूचना मिलते ही उप-निरीक्षक नितेश शर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। वहां विशेष मौर्य, रोहित मौर्य, राहुल विश्वकर्मा और रोहित पटेल, वादिनी और उनके पति मानसिंह मौर्य के साथ गाली-गलौज और मारपीट कर रहे थे।
भीड़ ने किया पुलिस पर हमला और चक्काजाम
👉जब पुलिस ने झगड़ा कर रहे लोगों को गिरफ्तार करने का प्रयास किया, तो वहां मौजूद महिलाओं और पुरुषों की भीड़ उग्र हो गई। आरोप है कि अजय सोनकर उर्फ छेदी और गणेश प्रसाद विश्वकर्मा ने "गांव में पानी की पाइप ठीक कराने का दिखावा कर पुलिस द्वारा लोगों को फंसाने" की झूठी अफवाह फैलाकर भीड़ को उकसाया।
👉इसके बाद, लगभग 80-90 अज्ञात महिलाओं और पुरुषों की भीड़ ने पी.ए.सी. तिराहे (सुल्तानपुर गांव के मोड़) पर सड़क जाम कर दी। जब प्रभारी निरीक्षक और अन्य पुलिस अधिकारियों ने भीड़ को समझाने की कोशिश की, तो भीड़ ने "मारो सालो को" के नारे लगाते हुए पुलिस पर ईंट-पत्थरों और लाठी-डंडों से हमला कर दिया।
पुलिसकर्मी घायल, गाड़ियां टूटीं
👉इस हिंसक हमले में उप-निरीक्षक प्रशांत पाण्डेय, उप-निरीक्षक पंकज कुमार मिश्रा और कांस्टेबल गौरव भारती समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। भीड़ ने पुलिस की सरकारी गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए और निजी वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। पुलिसकर्मियों की मेडिकल रिपोर्ट में उन्हें चोटें आने की पुष्टि हुई है।
चुनावी रंजिश का आरोप और जमानत अर्जी
👉इस मामले में पुलिस ने कई आरोपियों के खिलाफ बी.एन.एस. (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 191(2), 190, 121(2), 132, 352, 324(4) और 7 सी.एल.ए. एक्ट के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
👉गिरफ्तार आरोपियों (अर्जुन पटेल, टिंकू पटेल, पूजा व बेचू) की ओर से जिला एवं सत्र न्यायाधीश, वाराणसी की अदालत में जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल की गई है। जिसको न्यायालय द्वारा स्वीकार कर लिया गया।
""अदालत में बचाव पक्ष की ओर फौजदारी अधिवक्ता श्याम सुन्दर चौरसिया व राजकुमार शर्मा ने पक्ष रखा""
👉बता दें कि बचाव पक्ष के वकीलों का तर्क है कि यह मामला चुनावी रंजिश का है। उनका कहना है कि प्रधानी चुनाव और प्रधानी के वर्चस्व को लेकर अजय सोनकर और पूर्व प्रधान के बीच विवाद है, जिसमें निर्दोष लोगों को फंसाया गया है। वहीं, अभियोजन पक्ष ने पुलिस पर हुए जानलेवा हमले और सरकारी संपत्ति के नुकसान का हवाला देते हुए इसका विरोध किया है।
