✍️✍️ पत्नी से अप्राकृतिक यौन शोषण के मामले में आरोपी पति को कोर्ट से राहत


वाराणसी: 

 विशेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट) के न्यायाधीश नितिन पांडेय की अदालत ने थाना लंका के एक गंभीर आपराधिक मामले में पत्नी के साथ अप्राकृतिक यौन शोषण और प्रताड़ना के आरोपी दीपक कुमार गुप्ता की ओर से प्रस्तुत अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर लिया।

""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से फौजदारी अधिवक्ता श्याम सुन्दर चौरसिया व विश्वास सिंह ने पक्ष रखा""


मामले की पृष्ठभूमि

अभियुक्त दीपक कुमार गुप्ता, जो वर्तमान में जर्मनी में कार्यरत हैं, के विरुद्ध थाना लंका में उनकी पत्नी द्वारा मु०अ०सं० 371/2021 के तहत आईपीसी की धाराओं 377, 498ए, 452, 308, 323, 504 और 506 में मुकदमा दर्ज कराया गया था। वादिनी (पत्नी) का आरोप था कि शादी के बाद से ही उनके पति उनका शारीरिक शोषण कर रहे थे और उनकी मर्जी के खिलाफ अप्राकृतिक कृत्य करते थे। इसके अलावा, उन पर गला दबाने और दहेज के लिए प्रताड़ित करने के भी आरोप लगाए गए थे।


अदालत का तर्क

अदालत ने अपने आदेश में निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार किया:

  •   जांच में सहयोग: पुलिस की केस डायरी के अनुसार, अभियुक्त ने जांच के दौरान विवेचक को अपना पक्ष दिया और जांच में सहयोग किया।
  •   देरी से रिपोर्ट: कोर्ट ने गौर किया कि अनैतिक कृत्य के आरोप 2014 से लगाए गए थे, जबकि प्राथमिकी 2021 में दर्ज कराई गई।
  •  मेडिकल रिपोर्ट: वादिनी की चिकित्सीय आख्या में सूजन की पुष्टि तो हुई, लेकिन सूक्ष्म जांच में किसी भी शुक्राणु (Sperm) की उपस्थिति नहीं पाई गई।
  •   वैवाहिक विवाद: अदालत ने माना कि संपूर्ण मामला मुख्य रूप से वैवाहिक मतभेदों से उपजा हुआ प्रतीत होता है। चूंकि अब आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल हो चुका है, इसलिए हिरासत में पूछताछ (custodial interrogation) की आवश्यकता नहीं समझी गई।

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