फर्जी इकरारनामा तैयार कर लाखों की धोखाधड़ी करने और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी व रंगदारी मांगने के मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश सर्वजीत कुमार सिंह की अदालत ने आरोपी शेख अजदर हुसैन (निवासी: माँ वैष्णो नगर कॉलोनी, मण्डुवाडीह) की जमानत अर्जी को अपराध की गंभीरता देखते हुए निरस्त कर दिया है।
""अदालत में वादी की ओर से फौजदारी अधिवक्ता श्रीकांत प्रजापति, विनोद यादव और प्रशांत पाण्डेय ने जमानत का पुरजोर विरोध किया""
क्या है पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़ित हामिद खान ने थाना रामनगर में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि वर्ष 2018 में आरोपी शेख अजदर हुसैन ने एक जमीन को अपना बताकर हामिद खान और उनके सहयोगी दिनेश गुप्ता के साथ नोटरीयल एग्रीमेंट किया था। इस सौदे के एवज में हामिद ने अलग-अलग किस्तों में कुल 20 लाख रुपये बैंक और नकद माध्यम से आरोपी को दिए।
बाद में खुलासा हुआ कि जिस जमीन का एग्रीमेंट किया गया था, वह आरोपी की थी ही नहीं। आरोपी ने फर्जी और कूटरचित (Forged) दस्तावेज तैयार कर इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया था।
पैसे मांगने पर मिली जान से मारने की धमकी
आरोप है कि जब वादी को ठगी का अहसास हुआ और उसने नवंबर 2025 में अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपी, उसकी पत्नी शना शाह और पुत्र जुबरान शेख ने उसे गाली-गलौज दी। इतना ही नहीं, उससे 10 लाख रुपये की अतिरिक्त रंगदारी की मांग की गई और पैसे न देने पर बच्चों के अपहरण व हत्या की धमकी दी गई। वादी का आरोप है कि आरोपी के भतीजे 'बादल उर्फ आफताब' और अज्ञात गुर्गों ने भी रास्ते में रोककर उसे धमकाया।
संगठित गिरोह चलाने का भी आरोप
पुलिस रिपोर्ट और तहरीर के मुताबिक, शेख अजदर हुसैन एक संगठित गिरोह चलाता है, जिसमें उसके परिवार के सदस्य और अन्य लोग शामिल हैं। यह गिरोह फर्जी दस्तावेज बनाकर लोगों की गाढ़ी कमाई हड़पता है और पैसे वापस मांगने पर उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने या जान से मारने की धमकी देकर रंगदारी वसूलता है।
रामनगर पुलिस ने इस मामले में आरोपी के विरुद्ध धारा 420, 467, 468, 387, 504 और 506 IPC के तहत मुकदमा दर्ज किया है। न्यायालय ने मामले के तथ्यों और साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया।
