✍️✍️ पुलिस पर 'पावर' के दुरुपयोग का आरोप,वैध कागजात के बावजूद वाहन सीज

 

थाना चौक का मामला: एडवोकेट ने पुलिस कमिश्नर और मुख्यमंत्री कार्यालय में की शिकायत

वाराणसी।

जिले में यातायात पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ताजा मामला थाना चौक क्षेत्र का है, जहाँ वाहन के सभी वैध दस्तावेज (RC) मौजूद होने के बावजूद उप-निरीक्षक द्वारा वाहन को एमवी एक्ट की धारा 207 के तहत सीज करने का आरोप लगा है। इस मामले को लेकर अधिवक्ताओं में भारी रोष है और इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया जा रहा है।


क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, गत 27 जनवरी 2026 को वाहन संख्या UP 65 EV 5314 को चौक थाने में तैनात उप-निरीक्षक आलोक कुमार यादव ने नंबर प्लेट न होने के कारण रोका था। आरोप है कि चालक ने मौके पर ही रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) सहित सभी वैध कागजात प्रस्तुत किए, लेकिन उप-निरीक्षक ने उन्हें दरकिनार करते हुए वाहन को जबरन धारा 207 के तहत सीज कर दिया।


कानून की गलत व्याख्या का आरोप

प्रख्यात अधिवक्ता रवि प्रकाश श्रीवास्तव ने इस कार्रवाई को पूरी तरह अवैध करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

  •  धारा 207 का नियम: मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार, धारा 207 का प्रयोग केवल तब किया जा सकता है जब वाहन के पास आरसी या वैध परमिट न हो।
  •  नंबर प्लेट का विवाद: मात्र नंबर प्लेट न होना चालान का विषय हो सकता है, लेकिन कागजात होने पर वाहन सीज करना 'प्राकृतिक न्याय' के सिद्धांतों के विरुद्ध है।

 "यह सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 300(A) (संपत्ति का अधिकार) का उल्लंघन है। पुलिस अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर आम जनता में भय पैदा कर रही है।": रवि प्रकाश श्रीवास्तव, अधिवक्ता


उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग

मामले की गंभीरता को देखते हुए एडवोकेट श्रीवास्तव ने वाराणसी के पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल और उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री के ज्वाइंट सेक्रेटरी अरविंद मोहन को औपचारिक शिकायती पत्र भेजा है। पत्र में दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई और भविष्य में ऐसी 'धांधली' पर रोक लगाने की मांग की गई है।


जनता में भी बढ़ता असंतोष

शहर में चर्चा है कि यदि वैध कागजात दिखाने के बाद भी पुलिस मनमानी धाराओं में कार्रवाई करेगी, तो नागरिकों का प्रशासन पर से विश्वास उठ जाएगा। अब देखना यह है कि पुलिस कमिश्नर कार्यालय इस मामले में क्या संज्ञान लेता है।

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