✍️✍️ Bribery in ARTO Office: Retired Clerk and Broker Sentenced to 4 Years in Jail

 

✍️✍️ ARTO कार्यालय में रिश्वतखोरी: रिटायर्ड क्लर्क और दलाल को 4-4 साल की जेल

वाराणसी की विशेष अदालत ने सुनाया फैसला, दोनों दोषियों पर लगा जुर्माना; दूसरा क्लर्क साक्ष्य के अभाव में बरी

वाराणसी।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत (संख्या-02) की पीठासीन अधिकारी/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती पूनम पाठक ने एआरटीओ कार्यालय चंदौली के तत्कालीन लिपिक (क्लर्क) बाबूलाल और एक निजी व्यक्ति (दलाल) रंगनाथ सिंह को रिश्वतखोरी के मामले में दोषी पाते हुए चार-चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही दोनों अभियुक्तों पर 5,000-5,000 रुपये का अर्थदण्ड भी लगाया गया है, जिसे अदा न करने पर उन्हें एक-एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. वहीं, मामले के एक अन्य आरोपी प्रवर्तन लिपिक मिलन कुमार राय को अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया है.

ट्रक छोड़ने के एवज में मांगी थी 13 हजार की घूस

मामला 12 मार्च 2015 का है, जब एआरटीओ चंदौली द्वारा एक ट्रक (संख्या: HR-38-N-7173) को निरूद्ध कर अलीनगर थाने में खड़ा कराया गया था. ट्रक के चालक व शिकायतकर्ता राधे महतो (निवासी बेगुसराय, बिहार) ने जब गाड़ी छुड़ाने के लिए एआरटीओ दफ्तर में संपर्क किया, तो वहां कार्यरत लिपिक बाबूलाल ने ₹20,000 की सरकारी शमन शुल्क (रसीद) के अतिरिक्त ₹13,000 की रिश्वत की मांग की. बाबूलाल ने धमकी दी थी कि यदि पैसा नहीं दिया तो गाड़ी नहीं छूटेगी और उसे प्रताड़ित किया जाएगा.

जिलाधिकारी के निर्देश पर डीएम-एसपी ने डाला था छापा

परेशान होकर चालक ने मामले की शिकायत तत्कालीन जिलाधिकारी (डीएम) चंदौली से की. जिलाधिकारी के निर्देश पर 18 मार्च 2015 को जाल (Trap) बिछाया गया. चालक को ₹1,000 के दो हस्ताक्षरित नोटों सहित कुल ₹12,000 देकर एआरटीओ कार्यालय भेजा गया. जैसे ही चालक ने पैसे की डिलीवरी की सूचना दी, पुलिस टीम के साथ अधिकारियों ने मौके पर छापा मार दिया.

तलाशी के दौरान प्राइवेट व्यक्ति रंगनाथ सिंह की शर्ट की जेब से चालक के हस्ताक्षर वाले नोटों समेत ₹12,000 की रिश्वती धनराशि बरामद हुई. पूछताछ में रंगनाथ ने स्वीकार किया था कि वह एआरटीओ स्टाफ के कहने पर ट्रक चालकों से अवैध वसूली का काम करता है.

आलमारी से मिले ₹1.25 लाख निकले 'वैध', कोर्ट ने माना सरकारी धन

दौरे के दौरान अधिकारियों ने कार्यालय की आलमारी से ₹1,25,400 भी जब्त किए थे, जिसे अभियोजन पक्ष ने अवैध वसूली का धन बताया था. हालांकि, बचाव पक्ष के गवाहों (सहायक लेखाकार लालधर गौड़ और एआरटीओ राधेश्याम यादव) के साक्ष्यों से यह साबित हो गया कि यह राशि दिनभर में विभिन्न वाहनों से कटी रसीदों का वैध शमन शुल्क था, जिसे शाम को कैश चेस्ट में जमा किया जाना था. अदालत ने इस ₹1,25,400 की धनराशि को राज्य सरकार की वैधानिक धनराशि मानते हुए संबंधित विभाग के मद में जमा करने का आदेश दिया है.

दमदार पैरवी से दोषियों को मिली सजा

इस महत्वपूर्ण मुकदमे में अभियोजन पक्ष की ओर से वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी आशीष प्रकाश वर्मा, विशेष लोक अभियोजक आलोक कुमार श्रीवास्तव और विशेष लोक अभियोजक  कमलेश कुमार यादव ने प्रभावी पैरवी की और गवाहों के बयान दर्ज कराए, जिसके आधार पर कोर्ट ने दोनों को सजा मुकर्रर की.

उम्र और बीमारी के कारण कोर्ट ने नहीं दी अधिकतम सजा

सुनवाई के दौरान दोषियों के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि बाबूलाल अब सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, वृद्ध व बीमार हैं और उनका कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है. वहीं रंगनाथ सिंह पर परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी है और वह भी गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं. अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद दोषियों को अधिकतम दंड न देकर 4-4 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई, जिसकी सभी अवधियां साथ-साथ चलेंगी. निर्णय के बाद दोनों दोषियों को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर वाराणसी जिला कारागार भेज दिया गया है.

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