✍️✍️ इंस्टाग्राम पर फोटो वायरल करने की धमकी देकर नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले आरोपी को 10 वर्ष की कठोर सजा
वाराणसी।
स्थानीय पॉक्सो अदालत ने एक नाबालिग लड़की को ब्लैकमेल कर उसका अपहरण करने और उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाने के गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अतिरिक्त विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) न्यायालय संख्या-02 की न्यायाधीश रचना सिंह ने अभियुक्त बेचू कुमार को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही अदालत ने उस पर कुल 16,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है, जिसे पीड़िता को बतौर प्रतिकर (मुआवजा) दिया जाएगा।
""अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से वादी के वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता अरुण कुमार सिंह एवं अजय कुमार पाण्डेय व विशेष लोक अभियोजक मधुकर उपाध्याय ने पक्ष रखा""
क्या था पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 3 जनवरी 2022 की सुबह करीब 5:30 बजे की है, जब थाना लोहता क्षेत्र के धमरिया निवासी अभियुक्त बेचू कुमार पुत्र प्रेम लाल ने कक्षा 11 में पढ़ने वाली एक 16 वर्षीय नाबालिग छात्रा को फोन किया. आरोपी पीड़िता के ताऊ की दुकान पर काम करता था, जिससे वह उसे पहले से जानता था. उसने पीड़िता को शादी का झांसा देकर घुमाने के बहाने बुलाया. जब पीड़िता ने जाने से मना किया, तो आरोपी ने उसे ब्लैकमेल करते हुए धमकी दी कि यदि वह उसके साथ नहीं आई, तो वह उसकी इंस्टाग्राम की तस्वीरों को एडिट कर उसके पिता, परिवार और स्कूल में वायरल कर देगा. इस लोक-लाज और डर के कारण पीड़िता उसके साथ जाने को मजबूर हो गई. आरोपी पीड़िता को बीएचयू और सारनाथ सहित अलग-अलग स्थानों पर कमरा लेकर करीब 10-11 दिनों तक रखता रहा और उसकी इच्छा के विरुद्ध जबरन शारीरिक संबंध बनाता रहा. 14 जनवरी 2022 को जब आरोपी पीड़िता को पंजाब भगाने की फिराक में मुड़ैला बस स्टैंड पर लेकर पहुंचा, तो वहां पुलिस को देखकर वह पीड़िता को छोड़कर मौके से भाग गया, जिसके बाद पुलिस ने पीड़िता को सकुशल बरामद किया।
अदालत की कड़ी टिप्पणी और बचाव पक्ष के तर्कों का खंडन
बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया था कि पीड़िता और अभियुक्त के बीच प्रेम संबंध था और वह अपनी मर्जी से गई थी. उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट में हाइमन इन्टैक्ट होने का हवाला देकर बलात्कार की घटना से इनकार किया था.
अदालत ने इन दलीलों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया: "बलात्संग का अपराध गठित करने के लिए केवल आंशिक प्रवेशन ही कानूनन पर्याप्त है; इसके लिए जननांग पर चोट या पूर्ण प्रवेशन आवश्यक नहीं है. इसके अलावा, चूंकि पीड़िता घटना के समय मात्र 16 वर्ष 8 माह की एक नाबालिग बच्ची थी, इसलिए कानून की नजर में उसकी सहमति का कोई महत्व नहीं रह जाता."
अदालत ने आरोपी की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें उसने कहा था कि उसे दुकान से निकाले जाने की रंजिश के कारण झूठा फंसाया गया है. कोर्ट ने कहा कि भारतीय परिवेश में कोई भी पिता अपनी बेटी की सामाजिक प्रतिष्ठा और सम्मान को दांव पर लगाकर ऐसा झूठा आरोप नहीं लगाएगा।
अदालत द्वारा सुनाया गया दण्डादेश:
अदालत ने पत्रावलियों,प्रभावी बहसों और साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने अभियुक्त बेचू कुमार को सजा सुनाया।
