✍️✍️ किशोर न्याय बोर्ड का आदेश निरस्त: विशेष पोक्सो कोर्ट ने बाल अपचारी 'X' की अपील स्वीकार कर दी जमानत
""अदालत ने कहा- बिना ठोस आधार के किशोर को सुधार गृह में रखना न्यायसंगत नहीं; 1 लाख रुपये के बंधपत्र पर रिहाई का आदेश""
वाराणसी की विशेष अदालत (बाल न्यायालय/विशेष न्यायाधीश पोक्सो अधिनियम) ने एक महत्वपूर्ण कानूनी निर्णय लेते हुए किशोर न्याय बोर्ड के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत एक बाल अपचारी 'X' की जमानत अर्जी खारिज कर दी गई थी। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नितिन पाण्डेय की अदालत ने आपराधिक अपील की सुनवाई करते हुए किशोर को सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया।
""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता हरिशंकर सिंह, नीरज कुमार पाण्डेय, मिथिलेश मिश्रा व उमेश तिवारी ने पक्ष रखा""
क्या था मामला?
मामला थाना लालपुर/पाण्डेयपुर से संबंधित है, जहाँ अंतर्गत धारा 191(2), 126(2), 131, 115(2), 352, 351(2), और 105 बी०एन०एस० (गैर-इरादतन हत्या) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में पुलिस विवेचना के दौरान घायल महिला की मृत्यु हो जाने के कारण धारा 105 बढ़ाई गई थी। पूर्व में किशोर न्याय बोर्ड, चांदमारी (बड़ालालपुर) ने गत 28 अप्रैल 2026 को किशोर की जमानत याचिका को सरसरी तौर पर खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ उसके संरक्षक पिता के माध्यम से यह अपील दायर की गई थी।
अदालत की कड़ी टिप्पणी:
विशेष न्यायाधीश ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 12 के तहत जमानत एक सामान्य नियम है। जब तक यह साबित न हो कि किशोर के बाहर आने से उसका अपराधियों के साथ संसर्ग होगा या वह किसी नैतिक व मनोवैज्ञानिक खतरे में पड़ेगा, तब तक उसे जमानत से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने पाया कि किशोर न्याय बोर्ड ने इस मामले में विधिक मस्तिष्क का उचित प्रयोग नहीं किया था।
मेधावी छात्र है किशोर, कोई आपराधिक इतिहास नहीं:
अदालत ने जिला प्रोबेशन अधिकारी द्वारा प्रस्तुत सामाजिक अन्वेषण आख्या का गहराई से अवलोकन किया। रिपोर्ट के अनुसार, किशोर कक्षा 12 का एक मेधावी छात्र है, जो वर्तमान में अपनी पढ़ाई व परीक्षा की तैयारी कर रहा है। वह अपने पिता के व्यवसाय में भी मदद करता है और उसका कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है। अभियोजन पक्ष ऐसा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने में पूरी तरह विफल रहा जिससे यह साबित हो सके कि उसकी रिहाई से न्याय के उद्देश्यों में कोई बाधा आएगी।
इन शर्तों पर मिली जमानत:
अदालत ने अपील को स्वीकार करते हुए बाल अपचारी 'X' को 1,00,000/- (एक लाख) रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और उसके संरक्षक/पिता की समान धनराशि की एक प्रतिभू (जमानत) प्रस्तुत करने पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही, अदालत ने उसके पिता को निर्देशित किया है कि वे किशोर को किसी भी प्रकार की अनैतिक या आपराधिक संगति से दूर रखेंगे और उसकी शिक्षा व मानसिक-शारीरिक विकास का पूरा ध्यान रखेंगे।
