✍️मुद्दा कचहरी स्थानांतरण का,पढ़े बार मे पड़े प्रस्ताव पर पदाधिकारीयो ने क्या निर्णय लिया और जानिए वाराणसी कचहरी की कुछ रोचक तथ्य


वाराणसी:-
कचहरी स्थानांतरण की बात समाचार पत्र पर प्रकाशित होने पर गुरुवार को अधिवक्ता रवि प्रकाश श्रीवास्तव, अंकुर पटेल व रत्नेश्वर पांडेय ने प्रस्ताव दे कर आरोप लगाया कि समाचार पत्र  और अधिवक्ताओं के सोशल मीडिया पोस्ट से ज्ञात हुआ है कि कचहरी व पुलिस लाइन को वर्तमान जगह से स्थानांतरित कर संदाहा ले जाने की प्रक्रिया प्रशासन द्वारा की जाने वाली है जिलाधिकारी वाराणसी का बयान भी समाचार पत्र में प्रकाशित हुआ है। 

👉ज्ञात हो कि वर्ष 2017 में भी एक बार कचहरी को स्थानांतरित करने की बात सामने आई थी जिस पर अधिवक्ताओं ने वृहद आंदोलन किया था और सर्किट हाउस का घेराव किया था, जिसका संज्ञान लेकर माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता हेतु आमंत्रित किया था और वार्ता में मुख्यमंत्री द्वारा अधिवक्ताओं को मौखिक आश्वस्त किया गया था कि कचहरी का स्थानांतरण ना कर, कर उसी जगह पर विस्तारीकरण किया जाएगा। इस संबंध में अधिवक्ताओं से सुझाव भी मांगा गया था। मुख्यमंत्री जी के आश्वासन के बावजूद जिलाधिकारी वाराणसी का कचहरी स्थानांतरण का बयान अधिवक्ताओं के प्रति सरकार का धोखा है। बनारस बार एसोसिएशन के अध्यक्ष व महामंत्री प्रस्ताव पर संज्ञान लेते हुए साधारण सभा बनारस बार के सभागार में आहूत की जहां पर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई। 



👉अधिवक्ताओं ने अपने अपने मत को रखा कहा कि प्रशासन की घोर लापरवाही है कचहरी परिसर के आसपास जमीन काफी है पर कचहरी को जानबूझकर स्थानांतरण करके अधिवक्ता एकता को तोड़ा जा रहा है। कचहरी हमेशा जिले के सेंटर पर होनी चाहिए, जिससे वादकारियों, अपराधी, महिला, बच्चे आदि की सुरक्षा हो सके। कचहरी को अन्यत स्थानांतरण करना काफी घातक साबित हो सकता है सुरक्षा की दृष्टि से। जिलाधिकारी महोदय के द्वारा जो स्टेटमेंट अखबार में छपा है उसमे वह कचहरी को जिले के बॉर्डर पर स्थानांतरण करने की बात कर रहे है जो सुरक्षा की दृष्टि से ठीक नही है। रही बात स्टैंड व कचहरी विस्तार की तो कचहरी के आस पास काफी जमीन है जहाँ कचहरी के विस्तार के साथ स्टैंड भी बनाया जा सकता है जब गोदौलिया तांगा स्टैंड को हटाकर मल्टीप्लेक्स बनाई जा सकती है तो यहाँ क्यों नही। 




👉बनारस बार अध्यक्ष विनोद पांडेय ने निर्णय लिया कि कल अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी वाराणसी से मिलेगा और उनके द्वारा समाचार पत्र में दिए गए बयान की पुष्टि करेगा जिसके बाद आंदोलन की आगे की रूपरेखा तैयार की जाएगी। 

👉सभा में मुख्य रूप से बनारस बार महामंत्री विवेक सिंह, सेंट्रल बार महामंत्री कन्हैया पटेल, रवि प्रकाश श्रीवास्तव,अंकुर पटेल, रत्नेश्वर पांडेय, धीरेंद्र श्रीवास्तव, अशोक कुमार सिंह प्रिंस,दुर्गा सेठ, राजेश मिश्रा, विनोद शुक्ला,अनिल पाठक, हरिश्चंद्र मौर्य, आशीष सिंह, विनोद सिंह,नित्यानंद राय आदि अधिवक्ता गण उपस्थित थे।


वाराणसी कचहरी के कुछ रोचक तथ्य👇

वाराणसी जजशिप का इतिहास 1913 से लिया जा सकता है जब वरुणा नदी पर सिविल कोर्ट का निर्माण किया गया था।  उस समय वाराणसी जजशिप की अध्यक्षता जिला जज करते थे।  सिविल जज और जज स्मॉल कॉज कोर्ट अन्य अदालतें थीं।  वर्ष 1923 में वाराणसी में मुंसिफ सिटी और मुंसिफ हवाली की स्थापना हुई।  उन न्यायालयों का संपूर्ण वाराणसी पर क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र था जिसमें संपूर्ण जिला शामिल था।  वाराणसी जजशिप में उस समय दो आउटलाइन कोर्ट थे, एक ज्ञानपुर में अब संत रविदासनगर में और दूसरा चकिया में अब जिला चंदौली में था।  वाराणसी के सभी न्यायालय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के नियंत्रण में थे।  उस समय जिला न्यायाधीश के पास दीवानी और आपराधिक मामलों पर समग्र प्रशासनिक नियंत्रण था।  जिला न्यायाधीश और सिविल न्यायाधीश का मौद्रिक क्षेत्राधिकार असीमित था लेकिन क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार केवल वाराणसी जिले तक ही सीमित था।  वर्ष 1994 में नया जिला संत रविदास नगर (भदोही) जिला वाराणसी से बनाया गया था।  आगे वर्ष 1998 में वाराणसी जिले से नया जिला चंदौली बनाया गया था।  इस प्रकार अब वाराणसी जिले का कुल क्षेत्रफल 1,535 वर्ग किलोमीटर है।  2011 की जनगणना के अनुसार वाराणसी जिले की जनसंख्या 36,82,194 है, जिसमें पुरुष और महिला क्रमशः 19,28,641 और 17,53,553 हैं।  वाराणसी जिले में 27 पुलिस स्टेशन हैं।  वर्तमान में वाराणसी जजशिप में जिला एवं सत्र न्यायाधीश सहित 78 न्यायालय हैं।  जजशिप में एक जिला और सत्र न्यायाधीश, सोलह अतिरिक्त जिला न्यायाधीश और ग्यारह अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश / विशेष न्यायाधीश अर्थात् विशेष न्यायाधीश एससी / एसटी अधिनियम, विशेष न्यायाधीश ईसी अधिनियम और पांच विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार विरोधी, चार विशेष न्यायाधीश पोक्सो अधिनियम, तीन अतिरिक्त न्यायाधीश शामिल हैं।  जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट), एक प्रिंसिपल जज फैमिली कोर्ट, तीन अतिरिक्त प्रिंसिपल जज फैमिली कोर्ट, जज स्मॉल कॉज कोर्ट का एक कोर्ट और एक अतिरिक्त जज स्मॉल कॉज कोर्ट, एक मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और एक विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और बारह  दो एसीजेएम रेलवे सहित अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सिविल जज सीनियर डिवीजन की एक अदालत और अतिरिक्त सिविल जज सीनियर डिवीजन के चार कोर्ट, एक सिविल जज सीनियर डिवीजन (फास्ट ट्रैक कोर्ट), सिविल जज जूनियर डिवीजन के दो कोर्ट (शहर और हवाई),  ग्यारह अतिरिक्त सिविल जज (जूनियर डिवीजन), तीन सिविल जज जूनियर डिवीजन (फास्ट ट्रैक कोर्ट), और तीन जूडी  न्यायिक मजिस्ट्रेट।  जजशिप में दो बार एसोसिएशन हैं, अर्थात् बनारस बार एसोसिएशन और सेंट्रल बार एसोसिएशन।

1 Comments

  1. वाराणसी कचहरी जहा है वही रहेगी वरना बहुत बवाल होगा आमरण अनशन भी होगा, अधिकारियों के अय्यासी का अड्डा और बागानी का काम ,दोनो ही कचहरी से सटे हुए है जिन्हें हटाकर दूर भी कर देंगे तो कोई परेशानी नही होगी , कचहरी शहर के बीच मे होना चाहिए जिससे अधिवक्ता और वादकारियों को सुविधा रहे । कचहरी को अपने स्थान पर ही और ज्यादा विस्तृत करें क्योकि अभी जगह बहुत है आस पास

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