वादी के अधिवक्ता दीपक कुमार सेठ के द्वारा अदालत में वादी की ओर से बहस किया गया
वाराणसी: अतिरिक्त न्यायालय के न्यायाधीश सूर्य कुमार सिंह की अदालत ने अभियुक्त अनिल कुमार सेठ को 6 माह के कठोर कारावास तथा 8 लाख 5 हजार रूपए अर्थ दंड से दंडित किया। अर्थ दंड अदा न करने पर 3 माह का साधारण कारावास की सजा और भुगतनी होगी।
👉वादी के अधिवक्ता दीपक कुमार सेठ के द्वारा अदालत में वादी की ओर से बहस किया गया। इस दौरान अभियुक्त के अधिवक्ता ने भी उत्तर प्रस्तुत किया। उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण को सुनने के बाद, माननीय न्यायालय द्वारा फैसला दिया गया।
👉परिवादी का कथन है कि परिवादी व अभियुक्त दोनों भाई एक ही मकान में अलग-अलग रहते हैं अभियुक्त को मई 2009 में पांच लाख पचास हजार रुपए की आवश्यकता थी अभियुक्त ने परिवादी से बात किया और कहा कि अभियुक्त को पांच लाख पचास हजार रुपए दे दीजिए। एक महीने के अंदर वापस कर दिया जाएगा। परिवादी ने अभियुक्त को दो लाख का चेक तथा साढे तीन लाख रुपए नगद दिया। एक माह व्यतीत होने के बाद परिवादी ने अभियुक्त से रुपए वापस मांगे तो अभियुक्त ने कुछ दिन बाद रुपए देने की बात कही। एक माह पुनः बीत जाने पर जब परिवादी अभियुक्त से रुपया वापस मांगने गया तो अभियुक्त द्वारा आजकल में देने की बात कह कर टाल दिया गया। ऐसा करते-करते अभियुक्त द्वारा लगभग 7 वर्ष का समय व्यतीत कर दिया गया। परिवादी ने जनवरी 2018 में अभियुक्त को बकाया धनराशि की वापसी हेतु दबाव दिया तो अभियुक्त ने 26 हजार रुपए नगद दिए तथा शेष 5लाख 24हजार रुपए का चेक प्रदान किया। परिवादी ने उक्त चेक को अपने खाते में जमा किया तो कथित चेक अपर्याप्त निधि की टिप्पणी के साथ अनादरित हो गया, जिसकी सूचना बैंक ने परिवादी को मेमो द्वारा दिया। चेक अनादरित होने के पश्चात परिवादी ने रजिस्टर्ड डाक से नोटिस भेजा जो अभियुक्त को प्राप्त हो गई। अभियुक्त ने 15 दिन की अवधि व्यतीत होने के बाद जब रुपए वापस नहीं किया तो परिवादी ने दिनांक 20 मार्च 2018 को परिवाद संस्थित किया।

