बचाव पक्ष की ओर से अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता महेंद्र मोहन मिश्र व अभय अग्निहोत्री ने पक्ष रखा
वाराणसी: विशेष न्यायालय (एस०सी०/एस०टी०) एक्ट की न्यायाधीश रश्मि नन्दा की अदालत ने विक्रम विश्वकर्मा पुत्र राजेन्द्र विश्वकर्मा निवासी लच्छीपुरा कालोनी, नदेसर थाना कैंट जिला वाराणसी को एस०सी०/एस०टी० एक्ट, गाली गलौज व मारपीट के एक मामले में जमानत दे दी। बचाव पक्ष की ओर से अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता महेंद्र मोहन मिश्र व अभय अग्निहोत्री ने पक्ष रखा।
👉अभियोजन के अनुसार वादिनी मुकदमा सीमा देवी पत्नी रमेश कन्नौजिया निवासिनी लच्छीपुरा कालोनी, नदेसर थाना कैन्ट जिला वाराणसी ने थाना कैंट पर दिनांक 15.01.2020 प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई कि दिनांक 15.01.2020 की शाम 5.00 बजे अभियुक्त अपने अन्य साथियों के साथ उसके घर में घुसकर उसके साथ बलात्कार करने का प्रयास करते हुए उसकी साड़ी फाड़ा एवं उसके दोनों पुत्र सोनू कन्नौजिया एवं शुभम् कन्नौजिया के मुंह पर थूका और जातिगत गालियां देते हुए कहा कि तुम लोग डोम, चमार, धोबी हो, तुम लोग हमारा कुछ नहीं कर सकते हो, हम लोग राजनितिक रसूख वाले लोग हैं, कहते हुए मारने लगे और गालियां देने लगे और कहे कि तुम लोग हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते हो, कहते हुए वहां से भाग गये।
👉इस आधार पर थाना कैन्ट, वाराणसी पर अभियुक्त व अन्य के विरूद्ध धारा 147, 452, 376, 511, 354, 323, 504 भा०दं०सं० एवं धारा 3(1) (द) अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में अभियोग पंजीकृत किया गया तथा विवेचना के उपरान्त प्रार्थी / अभियुक्त के विरूद्ध धारा 323, 504, 506 भा०दं०सं० एवं धारा 3(1) (ध) अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में आरोप-पत्र प्रेषित किया गया।
👉बचाव पक्ष के अधिवक्ता द्वारा अदालत में तर्क दिया गया की अभियुक्त को गलत ढंग से झूठा फंसाया गया है तथा उसके द्वारा कोई मारपीट नहीं की गयी और न ही गाली व जान से मारने की धमकी दी गयी और न ही जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया। अतः उसे जमानत पर रिहा किया जाय।
👉वादिनी / विशेष लोक अभियोजक द्वारा जमानत का विरोध करते हुए यह कहा गया कि अभियुक्त द्वारा वादिनी व उसके पुत्रगण के साथ मारपीट की गयी और गाली गलौज व जान से मारने की धमकी दी गयी तथा जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया है। अतः अभियुक्त का जमानत प्रार्थनापत्र निरस्त किया जाये।
👉माननीय न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओ के तर्कों को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन कर अभियुक्त को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया।


