✍️✍️ कचहरी विस्थापन को लेकर प्रतिनिधि मंडल इलाहाबाद जाकर करेगा स्थिति स्पष्ट

 

वाराणसी: कचहरी संदहा विस्थापन को लेकर दोनों बार एसोसिएशन ( दी बनारस बार एवं दी सेन्ट्रल बार) ने एक संयुक्त बैठक की। जिसमें पूर्व में कचहरी विस्थापन को लेकर पड़े प्रस्ताव पर विचारोपरांत किया गया। बैठक की अध्यक्षता सेन्ट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मुरलीधर सिंह ने किया तथा दोनों बार के महामंत्री कमलेश कुमार सिंह यादव एवं सुरेन्द्र कुमार पांडेय के द्वारा जारी एक सूचना के माध्यम से अवगत कराया गया है, माननीय प्रशासनिक न्यायमूर्ति इलाहाबाद (प्रयागराज) द्वारा दिनांक-20-01-2024 को दीवानी न्यायालय परिसर में भ्रमण के बाद सार्वजनिक रूप से दिये गये आश्वासन पर कि दीवानी न्यायालय का विस्तार स्थानीय परिसर में ही कराया जायेगा। दीवानी न्यायालय कही स्थानान्तरित नही होगा। इस सन्दर्भ में लिखित भी मांगा जाय। इस स्थिति में संयुक्त कार्य समिति ने प्रस्ताव पारित किया कि माननीय प्रशासनिक न्यायमूर्ति को इस सम्बन्ध में पत्र भी प्रेषित किया जाय और उनसे लिखित आश्वासन मांगा जाय, साथ ही यह भी प्रस्ताव पारित किया गया कि एक प्रतिनिधि मण्डल इलाहाबाद उच्च न्यायालय जाकर 15 दिन के अन्दर उनसे वार्ता कर स्थिति स्पष्ट कराये तत्पश्चात पूर्व के प्रस्तावों पर अग्रिम कार्यवाही अमल में लायी जायेगी।

👉बता दें कि अधिवक्ता प्रेम प्रकाश गौतम एवं मंगलेश कुमार दूबे ने एक प्रस्ताव विगत महीने दिया था ,जिस पर दोनों बार के अध्यक्षो ने मामले में उपरोक्त निर्णय लिया।

👉बता दें कि कचहरी  विस्थापन को लेकर अधिवक्ताओं का एक वर्ग विगत दिवस कचहरी परिसर में जूलूस निकालकर विरोध प्रकट करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय में उनके अनुपस्थिति में उप जिलाधिकारी को पत्रक भी दिया था, तब से कचहरी विस्थापन को लेकर बराबर कुछ न कुछ चर्चा आय दिन होती नजर आई। 

👉अब इसे अफवाह कहे या हकीकत अधिवक्ताओं में चर्चा यह भी रही की संदहा में वाराणसी कचहरी के विस्थापन को लेकर राजस्व विभाग की टीम वहां पहुंचकर नाप-जोख करना प्रारंभ कर दिया है। जिसे लेकर वरिष्ठ अधिवक्ताओ का कहना है की सरकार एवं हाईकोर्ट, वाराणसी कचहरी को संदहा में विस्थापित करने का मसौदा तैयार कर चुकी है, दोनों बार के अध्यक्ष इस मामले में चुप्पी साधे है, क्या सरकार का विरोध करने का साहस नहीं। ऐसा अधिवक्ताओ के बीच काफी चर्चा भी रहा। इस बाबत कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओ द्वारा दोनों बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं महामंत्री के साथ ही उत्तर प्रदेश बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्षों एवं सदस्यों के ऊपर भी दबाव बनाया जा रहा है कि बात को गंभीरता से ले अन्यथा यदि विस्थापन की सारी प्रक्रिया सरकार एवं हाईकोर्ट ने पूरी कर ली तो उसे संदहा में विस्थापन से कोई रोक नहीं पायेंगा। वैसे कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा समय-समय पर कचहरी विस्थापन को लेकर पूर्व से वर्तमान तक विरोध प्रकट किया जाता रहा है।







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