✍️✍️ पिता की रहस्यमयी मृत्यु और संपत्ति पर कब्जे का आरोप, अदालत ने एफआईआर दर्ज करने का दिया आदेश

वाराणसी: मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार द्वितीय की अदालत ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए दशाश्वमेध थानाध्यक्ष को निर्देशित किया है कि पूनम देवी उर्फ पूर्णिमा पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्र में वर्णित गंभीर आरोपों पर समुचित धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना सुनिश्चित की जाए।

""पीड़िता पूनम देवी ने अपने अधिवक्ता प्रभु नारायण यादव एवं संजय कुमार विश्वकर्मा के माध्यम से अदालत में धारा 173(4) बीएनएसएस अंतर्गत प्रार्थना पत्र दाखिल किया था""

👉 प्रार्थना पत्र में पूनम देवी ने आरोप लगाया है कि उनके पिता स्व. रामाशंकर पाण्डेय, जो दशाश्वमेध क्षेत्र में अपने पुश्तैनी मकान में निवास करते थे, की मृत्यु 15 दिसंबर 2024 को संदिग्ध परिस्थितियों में हो गई। उन्हें पड़ोसी से आधी रात को फोन द्वारा पिता की मृत्यु की सूचना मिली, लेकिन उनके पट्टेदारों ने न केवल उन्हें सूचना देने में विलंब किया, बल्कि आनन-फानन में अंतिम संस्कार कर दिया।

👉 पीड़िता का आरोप है कि उनके पिता पूरी तरह स्वस्थ थे और उनकी मौत स्वाभाविक नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी गैरमौजूदगी में उनके हिस्से की संपत्ति पर अवैध कब्जा कर लिया गया, और विरोध करने पर उन्हें गाली-गलौज व धक्का देकर भगा दिया गया।

👉 पूनम देवी ने पहले पुलिस और उच्च अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर अंततः अदालत की शरण ली। अदालत ने मामले की गम्भीरता को ध्यान में रखते हुए एफआईआर दर्ज करने और निष्पक्ष विवेचना का आदेश दिया है।

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