विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के न्यायाधीश रविंद्र कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने वर्ष 2006 में दर्ज बहुचर्चित शकील अहमद हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने अभियुक्त—जमील अहमद उर्फ शिशावाला और मनोज मलिक —को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
👉 प्रकरण के अनुसार, थाना सिगरा में दर्ज इस मामले में मृतक के भाई ने संपत्ति विवाद के चलते शकील की हत्या का आरोप लगाया था। आरोप था कि यह हत्या एक सुनियोजित साजिश के तहत कराई गई थी, जिसमें सुपारी देकर वारदात को अंजाम दिलाया गया।
👉 बचाव पक्ष की ओर से अभियुक्त जमील अहमद के अधिवक्ता—अजय कुमार सिंह, श्यामसुंदर चौरसिया, राजकुमार शर्मा ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्य विरोधाभासी हैं और घटना की पुष्टि करने हेतु कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है।
👉 अदालत ने पाया कि विवेचना में कई गंभीर खामियां थीं और गवाहों की गवाही में भी पर्याप्त स्पष्टता नहीं थी। इन तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने “संदेह के लाभ” के सिद्धांत के अनुसार सभी अभियुक्तों को दोषमुक्त कर दिया।
