✍️✍️ हत्याकांड में नाती को मिली राहत, दोषमुक्त


वाराणसी:

अपर सत्र न्यायालय कक्ष संख्या प्रथम के न्यायाधीश देवकांत शुक्ला की अदालत ने 2009 में मंडुआडीह थाने में दर्ज एक हत्या के मामले में विजय कुमार गौड़ को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। यह फैसला इस आधार पर दिया गया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश करने में नाकाम रहा। 

""बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता अजय कुमार सिंह और श्याम सुंदर चौरसिया ने पैरवी की""

क्या था मामला?

👉 पूरा मामला विजय कुमार गौड़ की नानी रज्जो देवी की मृत्यु से जुड़ा है। 12 जनवरी 2009 को विजय कुमार ने खुद मंडुआडीह थाने को अपनी नानी की अचानक हुई मौत की सूचना दी थी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचायतनामा तैयार कराया, जिसमें पंचों ने मौत को स्वाभाविक माना। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि रज्जो देवी की मौत गला दबाने से हुई थी, जिसके बाद 28 फरवरी 2009 को अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया।

👉 जांच के दौरान, पुलिस ने विजय कुमार को ही हत्या का आरोपी बनाया और आरोप पत्र दाखिल किया। अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि विजय ने अपनी पत्नी के नाम नानी की संपत्ति का बैनामा (विक्रय विलेख) कराने के बाद उनकी हत्या इसलिए कर दी, ताकि बैनामे का सच सामने न आ सके।

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