✍️✍️ रिश्वतखोरी में रंगे हाथ पकड़ी गईं महिला इंस्पेक्टर व आरक्षी की जमानत अर्जी खारिज


वाराणसी।

 विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) की न्यायाधीश श्रीमती पूनम पाठक की अदालत ने थाना एंटी करप्शन में दर्ज भ्रष्टाचार के एक चर्चित मामले में अभियुक्त महिला इंस्पेक्टर सुमित्रा देवी व महिला आरक्षी अर्चना राय की ओर से प्रस्तुत जमानत प्रार्थना पत्र को सोमवार को निरस्त कर दिया।

गौरतलब है कि भ्रष्टाचार निवारण संगठन, वाराणसी इकाई की टीम ने दिनांक 17 अक्टूबर 2025 को महिला निरीक्षक सुमित्रा देवी एवं आरक्षी अर्चना राय को ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रथमेश पांडे व कमलेश कुमार यादव ने जमानत प्रार्थना पत्र का जोरदार विरोध किया, जिसके बाद अदालत ने दोनों अभियुक्ताओं की जमानत अर्जी को अस्वीकार कर दिया।

अभियोजन पक्ष का विवरण
अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता मेराज पुत्र मो० इस्लाम निवासी सिविल लाइन, जलालपुर, जनपद भदोही ने 16 अक्टूबर 2025 को भ्रष्टाचार निवारण संगठन, वाराणसी मंडल में शिकायत दर्ज कराई थी कि महिला थाना कमिश्नरेट वाराणसी में दर्ज एक दहेज उत्पीड़न के मुकदमे में उसका नाम निकालने के लिए महिला इंस्पेक्टर सुमित्रा देवी ने ₹20,000 की रिश्वत मांगी थी।

शिकायतकर्ता द्वारा पैसे देने से इनकार करने पर इंस्पेक्टर ने ₹10,000 अग्रिम देने की बात कही। इसके बाद शिकायतकर्ता ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन से संपर्क किया और ट्रैप की योजना बनी। 17 अक्टूबर को टीम ने पूर्व निर्धारित योजना के तहत महिला आरक्षी अर्चना राय को शिकायतकर्ता से ₹10,000 रिश्वत की राशि लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया।

इसके बाद दोनों महिला पुलिसकर्मियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत थाना कैंट, वाराणसी में मुकदमा पंजीकृत कर कार्रवाई प्रारंभ की गई।

अदालत ने आज यह मानते हुए कि मामला गंभीर प्रकृति का है तथा आरोप प्रथम दृष्टया सिद्ध होते हैं, दोनों अभियुक्ताओं की जमानत प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया।


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