वाराणसी।
नगर के सिगरा थाना क्षेत्र में हुए एक सनसनीखेज जानलेवा हमले के मामले में न्यायालय सत्र न्यायाधीश, वाराणसी ने आरोपी श्रोत श्रीवास्तव की जमानत प्रार्थना-पत्र को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रभारी सत्र न्यायाधीश संध्या श्रीवास्तव ने मामले की गंभीरता और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों को देखते हुए अभियुक्त को राहत देने से इनकार कर दिया।
""अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय फौजदारी अधिवक्ता मुनीब सिंह चौहान व वादी के अधिवक्ता विनोद कुमार शुक्ला, रूप कुंवर सेठ, गौरांग बाजपेयी ने जमानत याचिका का घोर विरोध किया""
क्या था मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 4 मई 2026 की रात लगभग 12:40 बजे की है। वादी संजय यादव अपने घर के बाहर खड़े थे, तभी एक सिल्वर/सफेद रंग की आल्टो कार से आए अज्ञात बदमाशों ने उन पर फायरिंग कर दी। हालांकि, इस हमले में वादी को कोई चोट नहीं आई, जिसे बचाव पक्ष ने 'नो इंजरी' केस बताते हुए जमानत का आधार बनाया था।
डिजिटल साक्ष्यों ने खोली पोल
अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन ने सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और केस डायरी के अहम तथ्य पेश किए। जांच में पाया गया कि:
- नंबर प्लेट की सफाई: घटना के बाद मजदा पार्किंग के पास कार खड़ी की गई, जहाँ चालक की बगल वाली सीट से उतरकर एक व्यक्ति ने पानी से नंबर प्लेट पर लगी मिट्टी साफ की ताकि पहचान छिपाई जा सके।
- पहचान: अगले सीसीटीवी फुटेज में कार का नंबर स्पष्ट दिखाई दिया।
- षड्यंत्र: विवेचना में सामने आया कि अभियुक्त श्रोत श्रीवास्तव ही उस कार को चला रहा था। यह भी खुलासा हुआ कि अभियुक्तों ने जीपीएस (GPS) लोकेशन के जरिए उदय उपाध्याय नामक व्यक्ति को ट्रैक कर हत्या के इरादे से हमला किया था।
अदालत की सख्त टिप्पणी
बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि आरोपी जौनपुर के डी.आई.ओ.एस. कार्यालय में लिपिक है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। लेकिन अदालत ने इन तर्कों को पर्याप्त नहीं माना। न्यायाधीश ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अभियुक्त द्वारा सह-अभियुक्तगण के साथ मिलकर प्री-डिजाइन्ड एवं प्रायर मीटिंग ऑफ माइण्ड (पूर्व नियोजित साजिश) के तहत अपराध कारित किया गया है। अपराध की प्रकृति अत्यंत गंभीर है"। इन्हीं आधारों पर अदालत ने अभियुक्त श्रोत श्रीवास्तव की जमानत अर्जी को गुण-दोष के आधार पर निरस्त कर दिया।
