वाराणसी:
स्थानीय सत्र न्यायालय ने हत्या के एक सनसनीखेज मामले में आरोपी प्रदीप जैसवार की जमानत याचिका को अपराध की गंभीरता को देखते हुए निरस्त कर दिया है। यह मामला थाना सिन्धौरा के अंतर्गत जनवरी 2026 में हुई अफताब आलम की हत्या से संबंधित है।
""अदालत में जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय फौजदारी अधिवक्ता मुनीब सिंह चौहान ने किया""
क्या था मामला?
अभियोजन के अनुसार, मृतक अफताब आलम 7 जनवरी 2026 को छपरा से पुणे नौकरी के लिए निकला था। अगले ही दिन उसका शव सिन्धौरा थाना क्षेत्र में बरामद हुआ। पुलिस जांच और बैंक स्टेटमेंट से पता चला कि मृतक के खाते से सह-अभियुक्त वीरेन्द्र यादव के खाते में लगभग 40,000 रुपये ट्रांसफर किए गए थे और एटीएम के माध्यम से भी पैसे निकाले गए थे।
हत्या का खौफनाक कारण (मोटिव)
अदालत में सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि हत्या के पीछे का कारण बेहद व्यक्तिगत था। सह-अभियुक्त वीरेन्द्र यादव का आरोप था कि मृतक अफताब ने उसे धोखे से 'गोमांस' खिला दिया था और वह सार्वजनिक रूप से इस बात को लेकर वीरेन्द्र का मजाक उड़ाता था। इसी आत्मग्लानि और अपमान का बदला लेने के लिए वीरेन्द्र ने प्रदीप जैसवार के साथ मिलकर रस्सी से गला घोंटकर अफताब की हत्या कर दी।
सीडीआर और लोकेशन ने खोली पोल
आरोपी प्रदीप जैसवार ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा था कि उसे रंजिशन फंसाया गया है, लेकिन कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) ने उसके दावों की हवा निकाल दी। घटना वाली रात प्रदीप, वीरेन्द्र और मृतक अफताब की लोकेशन लालपुर-पाण्डेयपुर और चोलापुर क्षेत्र में एक साथ पाई गई। वीरेन्द्र और प्रदीप के बीच उस रात 26 बार बातचीत हुई थी।
अदालत का फैसला
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटने और शरीर पर चोट के निशानों से हत्या की पुष्टि हुई थी। सत्र न्यायाधीश ने मामले के तथ्यों, साक्ष्यों और अपराध की प्रकृति को अत्यंत गंभीर मानते हुए आरोपी प्रदीप जैसवार को जमानत देने से इनकार कर दिया।
