वाराणसी।
जिला एवं सत्र न्यायालय ने लगभग 10 साल पुराने एक बहुचर्चित मामले में निर्णय सुनाते हुए दो अभियुक्तों को हत्या और साक्ष्य छिपाने के गंभीर आरोपों से बरी कर दिया है। अपर सत्र न्यायाधीश संध्या श्रीवास्तव की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव और अभियोजन पक्ष द्वारा संदेह से परे आरोप सिद्ध न कर पाने के कारण आरोपी हरिश्चंद्र वर्मा और उनके भाई सुशील वर्मा को दोषमुक्त घोषित किया।
""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से फौजदारी अधिवक्ता अवनीश त्रिपाठी बब्बू ने पक्ष रखा""
क्या था मामला?
मामला चौबेपुर थाना क्षेत्र के ग्राम तिवारीपुर का है। वादी मुकदमा इन्द्रसेन वर्मा (निवासी जौनपुर) ने आरोप लगाया था कि उन्होंने अपनी पुत्री पूनम की शादी करीब 8 साल पहले हरिश्चंद्र वर्मा के साथ की थी। आरोप था कि दहेज में गाड़ी और रुपयों की मांग को लेकर ससुराल पक्ष उसे प्रताड़ित करता था। 4 अगस्त 2016 को वादी को सूचना मिली कि उनकी बेटी की हत्या कर दी गई है और बिना सूचना दिए ससुराल वालों ने उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया।
पुलिस की कार्रवाई और धाराएं
पुलिस ने इस मामले में धारा 302 और 201 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। विवेचना के बाद हरिश्चंद्र और सुशील के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। 4 मई 2017 को न्यायालय द्वारा इन धाराओं में आरोप विरचित किए गए थे।
न्यायालय का फैसला
न्यायालय ने अपने 11 पन्नों के विस्तृत आदेश में उल्लेख किया कि अभियोजन पक्ष अपने कथानक को "युक्तिसंगत संदेह से परे" साबित करने में विफल रहा। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों में वह मजबूती नहीं मिली जिससे यह साबित हो सके कि अभियुक्तों ने ही हत्या कारित की है।
न्यायालय का आदेश
"अभियुक्तगण हरिश्चंद्र वर्मा एवं सुशील वर्मा को अपराध संख्या 300/2016 के अंतर्गत धारा 302 व 201 भा.दं.सं. के आरोप में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया जाता है।"
