✍️✍️ “State erupts in protest against the lathi-charge on lawyers in Lucknow; judicial work in Varanasi comes to a complete standstill.”

 

✍️✍️ लखनऊ में वकीलों पर लाठीचार्ज के विरोध में उबला प्रदेश, वाराणसी में न्यायिक कार्य पूरी तरह ठप

'आदेश 72 का था, बुलडोजर 240 पर चला दिया'— सेंट्रल बार अध्यक्ष का आरोप

""संयुक्त बार एसोसिएशन की बैठक में पुलिसिया कार्रवाई की निंदा, कलेक्ट्रेट परिसर में वकीलों का जोरदार प्रदर्शन""

वाराणसी:

लखनऊ में वकीलों के चैंबरों पर बुलडोजर कार्रवाई और इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के खिलाफ पूरे प्रदेश के वकीलों में जबरदस्त आक्रोश फैल गया है। इस घटना के विरोध में सोमवार को वाराणसी की 'दी बनारस बार एसोसिएशन' एवं 'दी सेंट्रल बार एसोसिएशन बनारस' की एक आपात संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर पुलिस प्रशासन की कार्रवाई को "घोर निंदनीय" और बर्बर बताते हुए सोमवार को पूरे दिन न्यायिक कार्य से विरत रहने (हड़ताल) का निर्णय लिया गया। वकीलों की इस हड़ताल के कारण कलेक्ट्रेट और दीवानी न्यायालय में न्यायिक कामकाज पूरी तरह ठप रहा।


कलेक्ट्रेट परिसर में चक्रमण कर जताया विरोध

संयुक्त बैठक के बाद दोनों बार एसोसिएशनों के अध्यक्ष क्रमशः विनोद शुक्ला व प्रेम प्रकाश सिंह गौतम और महामंत्री आशीष सिंह व सुधांशु मिश्रा के संयुक्त नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने दीवानी एवं कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार चक्रमण कर विरोध प्रदर्शन किया। इस विरोध मार्च में बड़ी संख्या में वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिवक्ता शामिल हुए और उन्होंने पुलिस व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।


""न्यायालय द्वारा मात्र 72 चैंबर हटाने का आदेश जारी किया गया था, लेकिन प्रशासन ने अपनी मनमानी दिखाते हुए लगभग 240 चैंबरों पर बुलडोजर चला दिया। बिना किसी पर्याप्त नोटिस और वैकल्पिक व्यवस्था के की गई यह कार्रवाई सीधे तौर पर अधिवक्ताओं का उत्पीड़न है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"" प्रेम प्रकाश सिंह गौतम, अध्यक्ष (सेंट्रल बार एसोसिएशन)



इन अधिवक्ताओं ने रखा निंदा प्रस्ताव

सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम प्रकाश सिंह गौतम की अध्यक्षता और बनारस बार के महामंत्री सुधांशु मिश्रा के संचालन में हुई इस बैठक में मुख्य रूप से अनिल कुमार पाठक, मुकेश कुमार मिश्रा, सौरभ पाण्डेय (पंकज), सुमित उपाध्याय, रजनीकांत मिश्रा, सुनील दत्त मिश्रा, आशुतोष शुक्ला और प्रेम चंद्र मिश्रा सहित कई दिग्गज अधिवक्ताओं ने प्रस्तावक के रूप में भाग लिया और घटना की कड़े शब्दों में भर्त्सना की।


क्या है पूरा मामला?

दरअसल, रविवार को लखनऊ जिला न्यायालय परिसर के बाहर नगर निगम की टीम भारी पुलिस बल के साथ हाईकोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाने पहुंची थी। जब वकीलों ने इस कार्रवाई का विरोध किया, तो पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज कर दिया। इस झड़प में कई अधिवक्ता घायल हो गए, जिनमें से एक की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

प्रशासन का दावा है कि उन्होंने पूर्व में 240 अवैध निर्माण चिह्नित कर नोटिस दिए थे, जबकि वकीलों का आरोप है कि उन्हें न तो पर्याप्त समय दिया गया और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। लखनऊ की इस चिंगारी ने अब पूरे प्रदेश को अपनी चपेट में ले लिया है, जिसकी गूंज आज वाराणसी में साफ देखने को मिली। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई और चैंबरों का उचित समाधान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन और उग्र होगा।

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