✍️✍️ "Two real brothers get anticipatory bail in POCSO case filed over land dispute"


✍️✍️ जमीनी विवाद में पॉक्सो के तहत दर्ज मुकदमे में दो सगे भाइयों को मिली अग्रिम जमानत

वाराणसी।

कैंट थाना क्षेत्र के अंतर्गत जमीन विवाद को लेकर दर्ज कराए गए एक गंभीर मामले में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नितिन पांडेय की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले के दोनों मुख्य आरोपियों, शुभम चौरसिया उर्फ मनीष और शिवम चौरसिया उर्फ मिट्टू (निवासी टकटकपुर, कैंट), की अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है। 

""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से फौजदारी अधिवक्ता रूप कुंवर सेठ, गौरांग बाजपेयी, दीपक कुमार सिंह एवं सौरभ यादव ने पक्ष रखा""

क्या था मामला और आरोप?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, ग्राम अनौला की रहने वाली वादिनी ने आरोप लगाया था कि 12 अप्रैल 2026 को आरोपी पक्ष उनके स्वामित्व वाली जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने की कोशिश कर रहा था। जब वादिनी और उनकी 17 वर्षीय बेटी ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने उनके साथ छेड़खानी की और विरोध करने पर उनके तथा परिवार के अन्य सदस्यों के साथ लात-घूंसों से मारपीट की। इसके साथ ही जान से मारने की धमकी और देख लेने की बात भी कही गई थी। इस शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था।

बचाव पक्ष की दलीलें: "रंजिश और अवैध वसूली का काउंटर केस"

आरोपियों के विद्वान अधिवक्ता ने अदालत में मजबूती से पक्ष रखते हुए सभी आरोपों को बेबुनियाद और मनगढ़ंत बताया। बचाव पक्ष की मुख्य दलीलें निम्नलिखित थीं:

  • 8 दिनों का भारी विलम्ब: कथित घटना 12 अप्रैल की बताई गई, जबकि एफआईआर 20 अप्रैल को दर्ज हुई। इस 8 दिन के अनुचित विलम्ब से साफ है कि कहानी सोच-समझकर गढ़ी गई।
  • अवैध वसूली (गुंडा टैक्स) का विरोध: आरोपी अपनी ही वैध जमीन पर निर्माण करा रहे थे, जिस पर वादिनी पक्ष पैसे की मांग कर रहा था।
  • पहले से दर्ज थी क्रॉस एफआईआर: घटना के ठीक अगले दिन यानी 13 अप्रैल को ही आरोपी पक्ष की महिला (शुभम के साले की पत्नी) ने वादिनी पक्ष के खिलाफ मारपीट और छेड़खानी की वास्तविक प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसी कार्रवाई से बौखलाकर वादिनी पक्ष ने दबाव बनाने के लिए यह काउंटर और झूठा मुकदमा दर्ज कराया।

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