वाराणसी के भेलूपुर थाना क्षेत्र से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। एक किराएदार व्यवसायी ने दुकान के मालिकों पर गंभीर आरोप लगाते हुए आरोप लगाया है कि उसे उसकी ही दुकान से जबरन बेदखल करने की कोशिश की गई, मारपीट की गई और दुकान में रखा लाखों का सामान लूट लिया गया। इस पूरे मामले में लंबे समय तक पुलिस थाने के चक्कर काटने के बाद, अंततः न्यायालय की शरण लेनी पड़ी, जिसके बाद FIR दर्ज हुई और अब इस मामले में अभियुक्तों को न्यायालय से जमानत मिली गई है।
""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से फौजदारी अधिवक्ता विनय कुमार जायसवाल व संजय वर्मा एवं सहयोगी अधिवक्ता शशि कुमार , दीपदर्शन प्रसाद व सरिता जायसवाल ने पक्ष रखा""
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित व्यवसायी, सैयद अली, ने अपनी शिकायत में बताया है कि उन्होंने भेलूपुर स्थित एक मकान का निचला हिस्सा वर्ष 2015 में मकान मालिक से 50,000 रुपये प्रतिमाह के किराए पर लिया था और वहां इलेक्ट्रॉनिक्स का शोरूम शुरू किया था। पीड़ित का दावा है कि उन्होंने दुकान के लिए 8,50,000 रुपये का प्रीमियम भी दिया था। आरोप है कि मकान मालिक की मृत्यु के बाद, उनके परिजनों (अनूप मौर्य, अरुण कुमार मौर्य और श्रीमती कमला देवी) ने पीड़ित को दुकान से निकालने की नीयत से परेशान करना शुरू कर दिया।
पीड़ित ने FIR में आरोप लगाया है कि 17 फरवरी 2020 को अभियुक्तों ने कुछ अन्य लोगों के साथ उनकी दुकान पर आकर जान से मारने की धमकी दी। पीड़ित का कहना है कि विरोध करने पर उन्हें लात-घूंसों से पीटा गया, दुकान में तोड़फोड़ की गई और सामान लूट लिया गया। इतना ही नहीं, पीड़ित का आरोप है कि 12 दिसंबर 2022 को जब वे अपनी दुकान पर पहुंचे, तो उन्होंने पाया कि दुकान का शटर खुला था और अभियुक्तों ने दुकान में रखा लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक्स का सामान और अन्य कीमती वस्तुएं गायब कर दी थीं।
पुलिस की ढिलाई और कोर्ट का हस्तक्षेप
पीड़ित का आरोप है कि पुलिस के पास बार-बार जाने और लिखित शिकायत देने के बावजूद भेलूपुर पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज नहीं किया। थक-हारकर पीड़ित ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय के आदेश पर भेलूपुर थाने में भा.द.सं. की धारा 380, 427, 506, 504 और 323 के तहत FIR दर्ज की गई।
अभियुक्तों को मिली जमानत
मामले में अभियुक्तों (अरुण मौर्य और कमला देवी) की ओर से अदालत में आत्मसमर्पण किया गया और जमानत याचिका दाखिल की गई। अभियुक्तों के विद्वान अधिवक्ताओं ने दलील दी कि उन्हें रंजिश के चलते गलत तरीके से फंसाया गया है और वे निर्दोष हैं।
मामले की सुनवाई करते हुए अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, वाराणसी ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अभियुक्तों को 20,000 रुपये के मुचलके और निजी बंधपत्र पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
