वाराणसी। जमीन के बैनामा विवाद, कथित धोखाधड़ी, मारपीट, चेन व नकदी छीनने तथा धमकी देने के मामले में सत्र न्यायालय ने आरोपी जितेन्द्र राजभर उर्फ जितेन्द्र को अग्रिम जमानत दे दी। अदालत मे बचाव पक्ष की ओर से फौजदारी अधिवक्तागण श्रीकांत प्रजापति व विनोद कुमार यादव ने पक्ष रखा।
मामला रामनगर थाना क्षेत्र से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार वादिनी अनुराधा देवी के पति राजेश गुप्ता रामनगर बाजार में चाट-पकौड़ी की दुकान चलाने के साथ जमीनों की दलाली का कार्य करते हैं। आरोप है कि रामनगर के कटेसर क्षेत्र में करीब 158 वर्गमीटर जमीन का सौदा कराया गया था, जिसका बैनामा अनुराधा देवी और पूनम राजभर के नाम होना था। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि 2 जनवरी 2025 को जितेन्द्र राजभर ने आर्थिक आवश्यकता बताते हुए अपनी जमीन का शेयर बेचने की बात कही। इसके बाद 2 मार्च 2025 को एक लाख रुपये नकद दिए गए तथा बैंक लोन के माध्यम से करीब तीन लाख रुपये अनुराधा देवी के खाते से जितेन्द्र की पत्नी पूनम के खाते में स्थानांतरित किए गए।
आरोप के मुताबिक रकम लेने के बावजूद जमीन का बैनामा किसी अन्य व्यक्ति, संतोष गुप्ता की पत्नी अंजली गुप्ता, के पक्ष में करा दिया गया। इसी को लेकर दोनों पक्षों में विवाद उत्पन्न हुआ।
वादीनी की ओर से आरोप लगाया गया कि घटना की जानकारी होने पर विरोध करने के बाद 10 जुलाई 2026 को शाम करीब 3:11 बजे जितेन्द्र राजभर, संतोष गुप्ता और चार-पांच अज्ञात लोग उनके घर पहुंचे। आरोप है कि आरोपियों ने घर में घुसकर गाली-गलौज और मारपीट की तथा राजेश गुप्ता को चोट पहुंचाई।
वादीनी ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने राजेश गुप्ता के गले से करीब 30 ग्राम सोने की चेन और जेब से 8,500 रुपये छीन लिए। साथ ही बची हुई जमीन का शेयर अपने नाम रजिस्ट्री करने के लिए धमकी देने का आरोप लगाया गया।
अभियुक्त की ओर से विद्वान अधिवक्तागण ने आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि जितेन्द्र राजभर को मुकदमे में झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष के अनुसार रजिस्ट्री के समय रकम कम पड़ने पर चार लाख रुपये नकद लिए गए थे। इसके एवज में वादीनी के पति द्वारा लोन लेकर तीन लाख रुपये अभियुक्त के खाते में दिए गए थे और एक लाख रुपये अभी शेष बताए गए।
