न्याय के मंदिर कहे जाने वाले कचहरी परिसर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। वाराणसी दीवानी कचहरी में बार एसोसिएशन के राजस्व पर डाका डालने के उद्देश्य से असली वकालतनामा की 'क्लोनिंग' का काला खेल खेला जा रहा है। शाम के समय कचहरी परिसर की नाली में भारी मात्रा में स्कैन किए हुए फर्जी वकालतनामा मिलने से अधिवक्ताओं में हड़कंप मच गया है।
स्कैनिंग के जरिए असली को मात देने की कोशिश
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ये डुप्लीकेट वकालतनामा हूबहू असली की तरह ही दिखाई देते हैं। जालसाजों ने असली वकालतनामा को हाई-क्वालिटी स्कैन कर उनका प्रिंट निकाला है, जिससे पहली नजर में असली और नकली का अंतर करना लगभग असंभव है। गौरतलब है कि वकालतनामा बार एसोसिएशन के काउंटरों से एक निश्चित शुल्क देकर प्राप्त किया जाता है, जिससे होने वाली आय अधिवक्ताओं के कल्याणकारी कार्यों में उपयोग होती है।
राजस्व की क्षति और अधिवक्ताओं में आक्रोश
वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना है कि इस तरह की जालसाजी न केवल अनैतिक है, बल्कि यह बार एसोसिएशन के आर्थिक हितों पर भी सीधा प्रहार है। कौड़ियों के भाव प्रिंट निकालकर बेचे जा रहे या उपयोग किए जा रहे इन कागजों से बार के राजस्व को भारी क्षति पहुँचाई जा रही है। अधिवक्ताओं ने इस कृत्य को "बेहद शर्मनाक और निंदनीय" करार देते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की मांग की है।
सेंट्रल बार एसोसिएशन सख्त, जाँच के आदेश
इस गंभीर मुद्दे पर सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम प्रकाश गौतम ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने घटना की घोर निंदा करते हुए कहा:
""यह बार की गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा विषय है। जो भी व्यक्ति इस तरह के अवैध कार्यों में लिप्त है, उसकी गहनता से जाँच की जा रही है। हम किसी भी सूरत में बार के राजस्व की चोरी बर्दाश्त नहीं करेंगे।""
अध्यक्ष ने सभी अधिवक्ताओं से भी अपील की है कि यदि किसी को भी इस तरह के फर्जीवाड़े की सूचना मिलती है, तो वे तत्काल एसोसिएशन को सूचित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहचान उजागर होने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कठोर विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
