✍️✍️ Two theft cases, same outcome, weak links in evidence dealt a blow to the prosecution; main accused and bullion trader acquitted.

 


✍️✍️ 2 चोरी कांड, एक जैसा नतीजा,साक्ष्यों की कमजोर कड़ी ने अभियोजन को दिया झटका, मुख्य आरोपी व सर्राफा व्यापारी दोषमुक्त

वाराणसी। जिला एवं सत्र न्यायालय ने कैंट थाना क्षेत्र में हुई चोरी और चोरी के आभूषण खरीदने के आरोप से जुड़े दो अलग-अलग सत्र परीक्षण मामलों में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश यजुवेन्द्र विक्रम सिंह की अदालत ने पर्याप्त एवं विश्वसनीय साक्ष्य के अभाव में मुख्य आरोपी संतोष बारी तथा सर्राफा व्यवसायी नरेन्द्र सेठ को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। अदालत मे बचाव पक्ष की ओर से अजय गेठे ने पक्ष रखा। 

 अभियोजन के अनुसार, पहले मामले में कैंट थाना क्षेत्र में पुलिस लाइन गेट के सामने स्थित मकान का ताला तोड़कर नकदी और आभूषण चोरी किए गए थे। वहीं दूसरे मामले में अर्दली बाजार के महावीर रोड स्थित किराए के मकान से दिनदहाड़े करीब एक लाख रुपये नकद और तीन लाख रुपये मूल्य के जेवरात चोरी होने का आरोप था। पुलिस ने दोनों मामलों में मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तार करने तथा उनके कब्जे से लैपटॉप व कुछ आभूषण बरामद होने का दावा किया था। इसी क्रम में सरसौली निवासी सर्राफा व्यवसायी नरेन्द्र सेठ पर चोरी के आभूषण खरीदने का आरोप लगाया गया था।

अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि चोरी की घटनाओं को किसी प्रत्यक्षदर्शी ने अपनी आंखों से नहीं देखा था और दोनों मामलों की प्राथमिकी अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज हुई थी। बरामदगी की कार्रवाई और उससे संबंधित फर्द के गवाहों के बयानों में भी महत्वपूर्ण विरोधाभास सामने आए। वादी एवं अन्य गवाहों ने पुलिस की बरामदगी संबंधी कहानी का अपेक्षित समर्थन नहीं किया। अदालत ने यह भी गौर किया कि कथित चोरी का सामान बरामद होने के बावजूद संबंधित वादियों द्वारा उसे न्यायालय से रिलीज कराने के लिए लंबे समय तक कोई प्रभावी प्रयास नहीं किया गया, जिसे न्यायालय ने परिस्थितियों के मद्देनजर अस्वाभाविक माना। अदालत ने माना कि अभियुक्तों द्वारा पुलिस के समक्ष की गई कथित स्वीकारोक्ति को, स्वतंत्र और ठोस साक्ष्य के अभाव में, दोषसिद्धि का एकमात्र आधार नहीं बनाया जा सकता। अभियोजन पक्ष दोनों मुकदमों में आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। पर्याप्त साक्ष्य के अभाव और अभियोजन की कहानी में मौजूद विरोधाभासों का लाभ देते हुए अदालत ने संतोष बारी और नरेन्द्र सेठ को दोषमुक्त कर दिया।

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