✍️✍️ पर्याप्त कारण के बिना पति से अलग रहने वाली पत्नी भरण-पोषण की हकदार नहीं : परिवार न्यायालय
वाराणसी। परिवार न्यायालय संख्या-01, वाराणसी की अपर प्रधान न्यायाधीश सुश्री एकता कुशवाह की अदालत ने भरण-पोषण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में पत्नी का प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि यदि पत्नी बिना पर्याप्त और उचित कारण के पति से अलग रहती है और पति के साथ रहने से इंकार करती है तो वह धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत भरण-पोषण पाने की अधिकारिणी नहीं है। बता दे की पति सहायक, जिला विकास अधिकारी , सुल्तानपुर मे कार्यरत है। अदालत मे पति की ओर से अधिवक्ता शशि कान्त यादव एव सहयोगी अधिवक्ता नेहा गोस्वामी व शुभम सेठ ने पक्ष रखा।
अदालत की विवेचना में पाया गया कि पत्नी द्वारा पति एवं उसके परिजनों पर पांच लाख रुपये अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित करने तथा पति के किसी अन्य महिला से कथित अनैतिक संबंध होने के आरोप लगाए गए थे, लेकिन इन आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके। वहीं, पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों से यह सामने आया कि पति ने पत्नी को अलग रखने के उद्देश्य से किराए का मकान भी उपलब्ध कराया था। इसके बावजूद पत्नी अपनी इच्छा से किराए का मकान छोड़कर मायके चली गई। अदालत ने यह भी पाया कि पति की ओर से पत्नी की विदाई कराने तथा पुत्र और स्वयं से संबंधित दुर्घटना एवं पारिवारिक कार्यक्रमों की सूचना देने के लिए कई बार प्रयास किए गए और संदेश भेजे गए। इसके बावजूद पत्नी ने पति से संपर्क नहीं किया और न ही उसके साथ वापस रहने की इच्छा जताई। अदालत ने अपने आदेश में धारा 125(4) दंड प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि पत्नी बिना किसी पर्याप्त कारण के अपने पति के साथ रहने से इंकार करती है, तो वह धारा 125 के तहत भरण-पोषण पाने की अधिकारिणी नहीं होती। अदालत के अनुसार, प्रार्थिनी यह साबित करने में सफल नहीं रही कि पति से अलग रहने का उसके पास कोई युक्तियुक्त एवं पर्याप्त कारण था। इसी आधार पर अदालत ने पत्नी द्वारा प्रस्तुत भरण-पोषण का प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया।
