Md. Isha Acquitted in 2016 Sigra Fire Incident Case


✍️✍️ 2016 के सिगरा अग्निकांड मामले में मो. ईशा दोषमुक्त

वाराणसी। सिगरा थाना क्षेत्र के लल्लापुरा स्थित कोनाद्वार में वर्ष 2016 में हुए चर्चित गैस सिलेंडर विस्फोट और अग्निकांड मामले में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश (आवश्यक वस्तु अधिनियम) सुनील कुमार खरवार की अदालत ने नामजद अभियुक्त मोहम्मद ईशा, पुत्र स्वर्गीय नन्हकू, को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित करने में विफल रहा। अदालत मे बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता अजय गेठे ने पक्ष रखा। 

अभियोजन के अनुसार, 15 जून 2016 को सुबह करीब 11:10 बजे पुलिस को सूचना मिली कि लल्लापुरा के कोनाद्वार स्थित मकान में गैस सिलेंडरों में आग लग गई है। सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो मकान से आग की लपटें उठ रही थीं और अंदर से लगातार सिलेंडर फटने की आवाजें आ रही थीं। पुलिस और अग्निशमन दल ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। राहत एवं बचाव कार्य के दौरान चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक अमरेंद्र कुमार पांडेय, कांस्टेबल उमाशंकर सिंह और कई स्थानीय लोग झुलस गए थे। घायलों को उपचार के लिए कबीरचौरा स्थित शिव प्रसाद गुप्त मंडलीय अस्पताल भेजा गया। हादसे में गंभीर रूप से झुलसे कल्लू (52) की उपचार के दौरान बीएचयू अस्पताल में मौत हो गई थी। पुलिस का आरोप था कि मोहम्मद ईशा अपने मकान के कमरे में बड़े घरेलू गैस सिलेंडरों से छोटे सिलेंडरों में अवैध तरीके से गैस भरने का काम करता था। इसी दौरान लापरवाही के कारण आग और विस्फोट हुआ। पुलिस ने मामले में आरोपपत्र दाखिल किया था।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। फैसले में विवेचना और साक्ष्य संकलन से जुड़ी कई कमियों को महत्वपूर्ण माना गया। अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष यह प्रमाणित नहीं कर पाया कि दुर्घटनाग्रस्त मकान आरोपी मोहम्मद ईशा के स्वामित्व या आधिपत्य में था। विवेचक ने जिरह में स्वीकार किया कि घटना के समय मकान के निचले तल पर मोहम्मद आसिफ का कब्जा था, जो चूल्हे की मरम्मत का काम करता था। पुलिस ने घटनास्थल से जले और फटे सिलेंडरों तथा गैस रिफिलिंग में इस्तेमाल होने वाले कथित उपकरण 'बांसुरी' की बरामदगी का दावा किया था। हालांकि, इन वस्तुओं को न्यायालय में प्रस्तुत कर साक्ष्य के रूप में साबित नहीं किया जा सका। घटना के समय मोहम्मद ईशा की घटनास्थल पर मौजूदगी भी साबित नहीं हुई। उसे मौके से गिरफ्तार किए जाने का भी तथ्य सामने नहीं आया। अभियोजन पक्ष आसपास के स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शियों के साक्ष्यों और अन्य घायलों के बयानों के जरिए आरोपों की पुष्टि करने में सफल नहीं रहा। अदालत ने विवेचना की इन कमियों को भी साक्ष्यों के मूल्यांकन में ध्यान में रखा।

अदालत ने अपने निर्णय में आपराधिक न्यायशास्त्र के स्थापित सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि किसी आरोपी को दोषी ठहराने के लिए अभियोजन पक्ष को आरोप संदेह से परे साबित करने होते हैं। केवल आशंका या परिस्थितियों के आधार पर आपराधिक दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने पाया कि मोहम्मद ईशा के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। इसी आधार पर उसे संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया। 

 वर्ष 2016 के सिगरा अग्निकांड में पुलिस ने अवैध गैस रिफिलिंग और लापरवाही को हादसे का कारण बताते हुए मोहम्मद ईशा के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किया था, लेकिन न्यायालय में आरोप प्रमाणित नहीं हो सके। अदालत का निर्णय अभियोजन साक्ष्यों की अपर्याप्तता और विवेचना की खामियों के आधार पर आया।

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