✍️✍️मैगी विवाद और मारपीट मामले में आरोपी को झटका, अग्रिम जमानत याचिका खारिज
कैंट क्षेत्र के कैफे में मारपीट, तोड़फोड़ और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप; एससी/एसटी एक्ट के तहत राहत देने से विशेष न्यायालय का इनकार
वाराणसी। कैंट थाना क्षेत्र में मैगी बनाने को लेकर हुए विवाद के बाद मारपीट, तोड़फोड़ और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल के आरोपों से जुड़े मामले में आरोपी शाश्वत पांडेय को अदालत से राहत नहीं मिली। विशेष न्यायालय (एससी/एसटी एक्ट) सर्वजीत कुमार सिंह की अदालत ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से वादी के अधिवक्ता संजय साहनी, अखिलेश कुमार व जिला सहायक शासकीय फौजदारी अधिवक्ता सत्येंद्र सिन्हा ने पक्ष रखा व अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध किया।
मैगी बनाने को लेकर विवाद का आरोप
अभियोजन के अनुसार, वादी आदित्य सोनकर ने कैंट थाने में दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि 12 अगस्त 2025 की रात करीब 12 बजे कैंट क्षेत्र स्थित एक कैफे में मैगी बनाने को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि शाश्वत पांडेय अपने साथियों के साथ कैफे पहुंचा और वादी तथा उसके चचेरे भाई अभिषेक सोनकर के साथ गाली-गलौज व मारपीट की। प्राथमिकी में लाठी-डंडों से हमला करने, कैफे के सामान में तोड़फोड़ करने, रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं।
कार जलाने की कोशिश का भी आरोप
वादी की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि 15 अगस्त 2025 को आरोपित पक्ष के लोग दोबारा दुकान पर पहुंचे और उसके चचेरे भाई की कार पर पेट्रोल डालकर आग लगाने का प्रयास किया। इसके अलावा सरकारी ट्रांसफार्मर के पास तोड़फोड़ किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
एससी/एसटी एक्ट के प्रावधानों के आधार पर याचिका खारिज
अग्रिम जमानत याचिका का अभियोजन पक्ष और विशेष लोक अभियोजक ने विरोध किया। उन्होंने एससी/एसटी एक्ट की धारा 18 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया इस अधिनियम के तहत अपराध के तत्व सामने आते हैं, इसलिए अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
न्यायालय ने प्राथमिकी, पत्रावली और संबंधित कानूनी प्रावधानों का अवलोकन करने के बाद प्रथम दृष्टया जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल, मारपीट तथा संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों को गंभीर माना। अदालत के अनुसार, मामले में प्रथम दृष्टया एससी/एसटी एक्ट के प्रावधान आकर्षित होते हैं। इसी आधार पर अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र पोषणीय न मानते हुए निरस्त कर दिया गया।
