✍️✍️ न्यू श्री साईं हॉस्पिटल एंड मैटरनिटी सेंटर, कठिरांव फूलपुर अस्पताल संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश
""कठिरांव बाजार के अस्पताल में बच्चे को रोकने का आरोप, बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में तोड़ा दम; सीएमओ की जांच में नहीं मिला अस्पताल का पंजीकरण""
वाराणसी। फूलपुर थाना क्षेत्र के कठिरांव बाजार में सड़क दुर्घटना में घायल मासूम की मौत के मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। घायल बच्चे को कथित तौर पर बिना पंजीकरण संचालित अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया था, जहां चिकित्सकों पर लापरवाही और परिजनों को गुमराह करने का आरोप है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (चतुर्थ) के न्यायाधीश नीरज कुमार त्रिपाठी की अदालत ने मामले में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध पाए जाने पर फूलपुर पुलिस को मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है। बता दे की पीड़ित अपने अधिवक्ता देवऋषि सिंह, संदीप कुमार व पूरन सिंह चौहान के जरिए 173(4) बीएनएसएस के तहत प्रार्थना पत्र न्यायालय मे दाखिल किया था।
ट्रक की टक्कर से घायल हुआ था मासूम
पत्रावली के अनुसार, विवेक चौहान का पुत्र आरुश चौहान अपनी मां और बहन के साथ बस से खरका गांव के पास उतरा था। इसी दौरान कठिरांव बाजार के समीप ट्रक संख्या UP63BT6789 की चपेट में आने से बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन और राहगीर उसे प्राथमिक उपचार के लिए घटनास्थल से करीब 500 मीटर दूर स्थित न्यू श्री साईं हॉस्पिटल एंड मैटरनिटी सेंटर ले गए।
हालत गंभीर होने पर भी अस्पताल में रोकने का आरोप
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल संचालक डॉ. दयानिधि सिंह चौहान और डॉ. प्रिंसी सिंह यादव ने बच्चे को उपचार के लिए अपने यहां रखा। परिजनों ने बच्चे की हालत गंभीर देखकर दूसरे अस्पताल ले जाने की बात कही, लेकिन चिकित्सकों ने कथित तौर पर उसकी स्थिति सामान्य बताते हुए उन्हें परेशान नहीं होने का भरोसा दिया।
आरोप है कि मौके पर पहुंचे पुलिस चौकी प्रभारी को भी चिकित्सकों ने बच्चे के ठीक होने की बात कही। बाद में परिजन उसे बीएचयू ट्रॉमा सेंटर ले गए, जहां चिकित्सकों ने आरुश को मृत घोषित कर दिया।
सीएमओ की जांच में पंजीकरण नहीं मिलने का खुलासा
मामले में पुलिस से सुनवाई नहीं होने पर विवेक चौहान ने न्यायालय की शरण ली। अदालत के आदेश पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, वाराणसी की ओर से चिकित्सकों का पैनल गठित कर जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, न्यू श्री साईं हॉस्पिटल एंड मैटरनिटी सेंटर का सीएमओ कार्यालय में पंजीकरण नहीं पाया गया। बड़ागांव के प्रभारी चिकित्साधिकारी के निरीक्षण के दौरान अस्पताल बंद मिला। स्थानीय लोगों ने अस्पताल के पिछले आठ-नौ महीने से बंद होने की जानकारी दी।
न्यायालय ने पुलिस विवेचना को बताया जरूरी
अदालत ने उपलब्ध पत्रावली और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का मामला पाया। न्यायालय ने माना कि मामले में पुलिस के माध्यम से साक्ष्य संकलन और विवेचना आवश्यक है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (चतुर्थ) के न्यायाधीश नीरज कुमार त्रिपाठी की अदालत ने आवेदक विवेक चौहान के धारा 173(4) बीएनएसएस के तहत प्रस्तुत प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए थानाध्यक्ष फूलपुर को मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है।
