अदालत में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता अवनीश कुमार सिंह, विष्णु गोविंद सिंह व दलीप सिंह ने पक्ष रखा
वाराणसी: अपर सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट (महिलाओं के विरुद्ध अपराध) के न्यायाधीश अवधेश कुमार की अदालत ने गैंगस्टर एक्ट के मामले में अजीत सिंह उर्फ रोशन पुत्र जय सिंह निवासी घोसाव थाना जलालपुर, जौनपुर को जमानत दे दी।अदालत में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता अवनीश कुमार सिंह, विष्णु गोविंद सिंह व दलीप सिंह ने पक्ष रखा।
👉अभियुक्त की और से जमानत प्रार्थनापत्र में कथन किया गया है कि प्रार्थी अभियुक्त के विरुद्ध मा. न्यायालय द्वारा दिनांक 30/09/2021 को गैर जमानतीय वारण्ट का आदेश पारित किया जा चुका है। प्रार्थी/अभियुक्त वि.स.प. उपरोक्त में दिनांक-02/12/2011 को जमानत प्राप्त कर रिहा है। प्रार्थी दिनांक 30/09/2021 के आदेश के विरुद्ध माननीय न्यायालय इलाहाबाद के समक्ष प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया जिसमें माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा दिनांक 18/08/2023 को आदेश पारित किया गया कि उक्त आदेश तिथि से दो सप्ताह के भीतर यदि प्रार्थी/ अभियुक्त आत्मसमर्पण कर जमानत प्रार्थनापत्र माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करता तो उसके जमानत प्रार्थनापत्र पर शीघ्रातिशीघ्र सुनवाई की जाये। प्रार्थी माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में माननीय न्यायालय के समक्ष (एफ. टी. सी. द्वितीय) आत्मसमर्पण कर अभिरक्षा में निरुद्ध है। आदेश प्रार्थनापत्र के साथ संलग्न है। प्रार्थी की जमानत प्रार्थनापत्र की सत्येन्द्र कुमार अंटिल बनाम सी.बी.आई. एवं अन्य 2021 एस. सी. सी. ऑनलाइन एस सी 922 में प्रतिपादित विधि व्यवस्था एवं दिशा निर्देश के अनुसार शीघ्रातिशीघ्र निस्तारित किया जायेगा। उक्त दो सप्ताह तक (आदेश की तिथि से ) या अभियुक्त के आत्मसमर्पण किये जाने तक जो भी नजदीक हो दिनांक-03-09/2021 का पारित आदेश को प्रभाव में नहीं लाया जायेगा। माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा पारित आदेश की सत्यप्रति जमानत प्रार्थनापत्र के साथ संलग्न है। प्रार्थी अभियुक्त पश्चात् जमानत स्वयं व जरिए अधिवक्ता ना न्यायालय के समक्ष उपस्थित होता रहा है। प्रार्थी गैर प्रदेश(मुम्बई) में प्राइवेट नौकरी कर अपना व अपने परिवार का भरण पोषण करता है। कोविड-19 के दौरान हुई अव्यवस्था के कारण प्रार्थी अपने अधिवक्ता मो. वसीम खान के सम्पर्क से बंचित हो गया जिसके कारण प्रार्थी अभियुक्त के विरुद्ध गैर- जमानतीय वारंट का आदेश प्रार्थी के विरुद्ध पारित हो गया। प्रार्थी का मार्च 2022 के दुर्घटना हो गया. जिसके कारण वह चलने फिरने में पूर्णत असमर्थ रहा। दुर्घटना के समय का फोटो प्रार्थनापत्र के साथ संलग्न है। प्रार्थी को जब जानकारी हुई कि उसके विरुद्ध गैर जमानतीय वारंट माननीय न्यायालय द्वारा आदेशित है तो प्रार्थी अपने अधिवक्ता महोदय श्री मो. वसीम खान से मिलने आया तो पता चला कि. अधिवक्ता महोदय भी काविड-19 के प्रभाव में इन्तकाल हो चुके है। प्रार्थी अभियुक्त जानबूझकर समत न्यायालय उपस्थित होने वंचित नहीं रहा है एवं भविष्य में नियत प्रत्येक तिथियों पर उपस्थित होता रहेगा। उपरोक्त परिस्थितियों में प्रार्थी के विरुद्ध जारी गैर जमानतीय वारंट का आदेश निरस्त कर प्रार्थी को जमानत पर रिहा किया जाना न्यायहित में आवश्यक होगा। पार्थी पता उपरोक्त का स्थायी निवासी है बाद जमानत पलायत की कलई सभापता नहीं है एवं प्रार्थी पर्याप्त चल व अचल सम्पति का धारक है। अभियुक्त द्वारा उचित जमानत व मुचलके पर जमानत पर रिहा किये जाने की प्रार्थना की गयी है।
👉अभियुक्त की और से मौखिक रूप से यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि न्यायालय के समक्ष जरिए आत्मसमर्पण उपस्थित है। पाय अभियुक्त प्रस्तुत मामले में दिनांक 02/12/2011 को "जमानत पास कर रिहा रहा है। पायी गैर प्रदेश (मुम्बई) में प्राइवेट नौकरी कर अपना अपने परिवार का भरण पोषण करता रहा है। कोविड-19 के दौरान प्रार्थी के विद्वान अधिवक्ता की मृत्यु हो जाने के कारण प्रार्थी अभियुक्त अपने अधिवक्ता के सम्पर्क से बंचित हो गया और उसे मुकदमे की नियत तिथि जात नहीं हो पायी जिसके कारण पत्रावली में हाजिरी माफी प्रस्तुत नहीं की जा सकी और नियत तिथि ज्ञात न हो पाने के कारण न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं पाया जिसके कारण दिनांक- [03/09/2021 को न्यायालय से एम.बी.डब्लू जारी कर दिया गया। प्रार्थी की मार्च 2022 को दुर्घटना हो गयी जिसके कारण यह चलने फिरने में पूर्णतः असमर्थ रहा जिसके समर्थन में दुर्घटना के समय का फोटो प्रार्थनापत्र के साथ संलग्न है तथा विद्वान अधिवक्ता का मृत्यु प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत है। प्रार्थी:अभियुक्त ने माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया, जिसमें Satender Kumar Antil vs Central Bureau of Investigation and another 2021 SCC Online SC 922 की विधि व्यवस्था में दिये गये दिशा निर्देशों को दृष्टिगत रखते हुए जमानत प्रार्थनापत्र निस्तारित किये जाने का निर्देश दिया गया है। अभियुक्त ने जमानत के बाद कोई अपराध कारित नहीं किया है तथा गंगचाट में दर्शाये गये दो मुकदमों धारा-307 भादस व चारा-325 आर्म्स एक्ट क्रमश अपराध सं. 2265/2011 229/2011] थाना बड़ागाँव में दोषमुक्त किया जा चुका है। आवेदक अभियुक्त भविष्य में न्यायालय के समक्ष उपस्थित आता रहेगा। आवेदक/ अभियुक्त जानबूझकर अनुपस्थित नहीं रहा है।
👉विद्वान अभियोजन विशेष सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी द्वारा कहा गया कि अभियुक्त जमानत प्राप्त होने के बाद कई तिथियों से अनुपस्थित चल रहा था तथा उसके द्वारा न्यायालय के आदेश का अनुपालन न करने के कारण उसके विरुद्ध न्यायालय द्वारा पूर्व में एन.बी.डब्लू. जारी किया गया था, अभियुक्त की जमानत का घोर विरोध किया गया।।
👉माननीय न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ता को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन कर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया।

