प्रदेश में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। हर तरफ कोहरे और ठंड हवाओ से जन जीवन लगभग ठिठुर सा गया है। ऐसे में यदि बात की जाए वाराणसी कचहरी की तो सिपाही से लेकर अधिवक्ता अपने कार्य के प्रति ठंड में खुले आसमान के नीचे ईमानदारी से कार्य करने को मजबूर है। प्रतिदिन वादकारियो की भीड़ लगी रहती है। अधिवक्ता अपने क्लाइंट के प्रति वफादारी निभाते हुए पेन चलाने को मजबूर है और सिपाही ड्यूटी करने में। लेकिन हर वर्ष की भांति नगर निगम द्वारा अलाव की व्यवस्था परिसर में नही की गई।
👉 बार के पदाधिकारीगण द्वारा अवगत कराने पर भी जोनल अधिकारी जो की पब्लिक सर्वेंट बोले जाते है, बेतुका बात करने से बाज नही आ रहे। ऊपर से परिचय देने पर आश्वासन दे रहे है। ठंड बीतने के बाद नगर निगम द्वारा अलाव लगाने का क्या औचित्य है।
👉 कुछ अधिवक्ता के द्वारा थोड़ी बहुत लकड़ी को इक्कठा कर अलाव की व्यवस्था देखने को मिली वही इंसान के साथ साथ बेजुबान जानवर के बच्चे भी ठंड में मजबूर होकर अलावा के पास बैठे दिखे।



