✍️✍️ पास्को एक्ट के मामले में अभियुक्त को मिली जमानत


बचाव पक्ष की ओर से अदालत में वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता अशोक सिंह प्रिंस, विवेक सिंह,अंबरीश सिंह एवं सहयोगी अधिवक्ता आलोक तिवारी व आलोक सिंह ने पक्ष रखा।

वाराणसी: नाबालिक बच्ची के साथ अश्लील हरकत करने व वादिनी को जान से मारने की धमकी देने के एक मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/विशेष न्यायालय पाक्सो एक्ट के न्यायाधीश शैलेंद्र सिंह की अदालत ने अभियुक्त विकास दुबे पुत्र विद्याधर दुबे उर्फ तूफानी निवासी ग्राम अखरी थाना रोहनिया वाराणसी को जमानत दे दी। बचाव पक्ष की ओर से अदालत में वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता अशोक सिंह प्रिंस, विवेक सिंह,अंबरीश सिंह एवं सहयोगी अधिवक्ता आलोक तिवारी व आलोक सिंह ने पक्ष रखा।

👉प्रकरण के मुताबिक पीड़िता की मां के द्वारा थाना रोहनिया में तहरीर दी गई की दिनांक 3 दिसंबर 2023 को उसकी बेटी जो की नाबालिक है, अखरी चौराहा के पास स्थित श्रीराम सुपर मार्केट जनरल स्टोर में चिप्स व चॉकलेट लेने गई थी, उक्त दुकान में मौजूद दुकानदार द्वारा उसकी बेटी के साथ सामान देने के बहाने दुकान के अंदर अश्लील हरकत की गई और कहा गया कि समान का पैसा मत देना,पीड़िता ने भागकर प्रार्थिनी को सभी बातें बताइ, प्रार्थिनी दुकान में बच्ची के साथ गई और दुकानदार से पूछने लगी, तब तक भीड़ आ गई,प्रार्थिनी ने दुकानदार से पूछा कि तुमने ऐसा कार्य क्यों किया है,तभी वह भद्दी भद्दी गाली देकर धमकी दिया कि मुकदमा के चक्कर में पड़ोगी तो तुम लोगों की हत्या हो जाएगी। उसके बाद मैं डरकर बगल में बने पुलिस चौकी बूथ पर गई और पुलिस कांस्टेबल को साथ लेकर दुकान में गई और सीसीटीवी कैमरा चेक कराया तथा सीसीटीवी फुटेज में उक्त घटना का सुस्पष्ट फुटेज प्राप्त हुआ।

👉अभियुक्त की ओर से प्रस्तुत जमानत प्रार्थना पत्र में विद्वान अधिवक्ता के द्वारा तर्क दिया गया कि अभियुक्त निर्दोष है और उसके सगे चाचा ने षड्यंत्र के तहत साजिशन मुकदमे में अभियुक्त बनवाया है, अभियोजन कथानक असत्य मनगढ़ंत व अभियुक्त के परिवारो द्वारा साजिश व षड्यंत्र से रचित है, जिसकी कोई सत्यता नहीं है। कथित घटना 3 फरवरी 2023 की सोनभद्र की रहने वाली वादिनी की पुत्री के साथ कहीं गई है और इसकी सूचना थाने पर 6 दिसम्बर 2023 को दी गई है और अभियुक्त को 8,9 दिसंबर 2023 को न्यायालय लाया गया है। विलंब का कोई स्पष्टीकरण न हीं वादिनी द्वारा दिया गया है और न ही विवेचक द्वारा दिया गया है। अभियुक्त का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। अतः अभियुक्त को उचित जमानत एवं मुचलके पर रिहा करने की याचना की गई।

👉विद्वान विशेष लोक अभियोजन द्वारा जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध किया गया तथा कथन किया गया कि अभियुक्त द्वारा वादिनी मुकदमा की नाबालिक पुत्री के साथ अश्लील हरकत करने तथा पीड़िता व वादिनी मुकदमा द्वारा विरोध करने पर उनको भद्दी भद्दी गाली देते हुए जान से मारने की धमकी देने का अपराध कारित किया गया है, अतः जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त किया जाए। 

👉माननीय न्यायालय के द्वारा अभियुक्त के विद्वान अधिवक्ता एवं विशेष लोक अभियोजक के तर्कों को सुना गया एवं पत्रावली का अवलोकन कर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया।




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