""वादी की ओर से जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध वरिष्ठ अधिवक्ता शशिकांत दुबे एवं सहयोगी अधिवक्ता आलोक सौरभ पांडेय,अंकित दुबे एवं विकास यादव ने किया""
वादी द्वारा दर्ज प्राथमिकी में बताया गया की 8 से 10 लोगों द्वारा लाठी रॉड एवं हाकी से हमला किया गया। मारते हुए अधमरा कर दिया। वादी किसी तरह जान बचाकर निकला और पुलिस के पास पहुंचा और तहरीर लेने के बाद पुलिस के साथ एम्बुलेंस से ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया जहां वादी का इलाज जारी है। जबकि अभियोजन द्वारा दाखिल जमानत प्रार्थना पत्र को वादी के अधिवक्ता द्वारा पोषणीय ना होने की बात कही गई और यह तर्क दिया गया कि एससी एसटी एक्ट 1998 की धारा 18 को देखा जाए तो उसमें स्पष्ट रूप से प्रावधानित है कि धारा 438 का कोई बात इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध करने के अभियोग पर किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के किसी मामले के संबंध में लागू नहीं होगी ।


