"" अदालत में वादी की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता महेंद्र मोहन मिश्र, आलोक पाठक व अमित त्रिपाठी बंटी ने अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र का घोर विरोध किया ""
👉 प्रकरण के अनुसार वादी जमील अहमद द्वारा तहरीर दिया गया कि कि वह शारीरिक रूप से दिव्यांग है,उसके पिता एक अनपढ़ व अंगूठा छाप व्यक्ति थे। विपक्षी कुरैशा बीवी जो रिश्ते में बहन लगती है प्रार्थी के पिता के इलाज व देखभाल करने के नाम पर अक्सर घर पर आया जाया करती थी जिसके कारण प्रार्थी को अपनी बहन पर कोई संदेह नहीं होता था,उसके पिता दिनांक 11 जून 2019 को मौजा अमरपुर स्थित रकबा 2392 को प्रार्थी के पक्ष में हिब्बा जवानी कर दिया और प्रार्थी का नाम सरकारी अभिलेखों में दर्ज हो गया और प्रार्थी को एक नया मकान नंबर दर्ज हुआ। प्रार्थी अपने जमीन पर कार्य निर्माण करने गया तो प्रार्थी की बहन बोली कि इस काम को रोक दो और जमीन को मेरे पिता ने मुझे दान दिया हुआ है। प्रार्थी ने आरोप लगाया कि जब सभी दस्तावेजो की जांच कराई तो कुरैशा बीवी ने जबीउल्लाह, मकसूद व खुशबुद्दीन की मदद से जाली, फर्जी व कूट रचित दस्तावेज तैयार कराई थी।


