सादर प्रणाम 🙏 हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बार एसोसिएशन के चुनाव में विभिन्न पदों के प्रत्याशी अपने अपने समर्थकों के साथ प्रचार प्रसार में मशहूल है। नए दौर के साथ प्रचार करने का तरीका भी बदला है। प्रत्याशी अपने मतदाता को लुभाने के लिए तरह तरह के जद्दोजहत करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
👉वाराणसी कचहरी परिसर में दो बार एसोसिएशन होने से अलग अलग दो चुनाव होते हैं, चुनावी समर में यह त्यौहार जैसा प्रतीत होता है। दो बार एसोसिएशन के एक ही परिसर में चुनाव होने से प्रत्याशियों की संख्या काफी अधिक रहती हैं, ऐसे में मतदाता भी हैरान,परेशान व संकोच में रहते हैं कि किसके साथ घूमे या प्रचार करें क्योंकि की सभी अपने बीच के ही साथी रहते है। किसी का प्रचार करने पर कोई साथी रूठना स्वाभाविक है।
👉अब बात करते हैं दोनों बार के चुनाव की, दोनो बार में मिलाकर इस वर्ष चार महिला अधिवक्ता प्रत्याशी है, वो भी सभी सेंट्रल बार के विभिन्न पदों पर चुनाव लड़ रही हैं,वही ये महिला अधिवक्ता पुरुष अधिवक्ता प्रत्याशियों को चुनावी टक्कर देने में पीछे नहीं है।
👉हमारा मानना है कि कचहरी चुनाव में प्रत्येक व्यक्ति को मतदान को गम्भीरता से लेना चाहिए, हमारे समाज में महिला प्रत्याशी की संख्या बढी है। जहाँ सालो पहले महिलाओं को समाज में वकालत करने से रोका जाता था वहा आज समाज में महिलाए हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही है। हमे समाज के हर क्षेत्र में महिलाओं को प्रोत्साहित करना चाहिए।
👉 बात रही वोट की तो वोट से ही हमारा भविष्य तय होता है इसलिए वोट देना जितना आवश्यक है उतना ही ज्यादा वोट का इस्तेमाल सोच समझकर करना। महिला या पुरुष प्रत्याशी जो भी हो हम सभी को प्रत्येक प्रत्याशी के स्वभाव के साथ उसके कामकाज करने की मंशा का आकलन करना भी बहुत जरूरी है। ऐसे व्यक्ति को चुने जो फैसले ले सके, विकास के बारे में सोच रखते या रखती हो। वर्ग से उठकर हर वर्ग के लोगों के साथ बिना भेदभाव के कार्य करे। किसी की कठपुतली न बने। अपने आप में बेबाक, कर्मठ व निर्णायक हो....जो अधिवक्ता के हित के बारे में सोच रखे और कार्य करे, जितने के बाद सिर्फ महीना साल बिताकर बिना कार्य किए अच्छे बने रहने का ढोंग न रचे व करे। अंतः कहना चाहूंगी जिसको भी जीत हासिल हो उन सभी को अग्रिम हार्दिक बधाई व शुभकामना लेकिन जीतने के बाद कोरम पूरा करने से अच्छा है कुछ काम कर युगों युगों तक नाम करना बेहतर होगा।



