वाराणसी: अपर सत्र न्यायालय (पोक्सो तृतीय) के न्यायाधीश विनोद कुमार की अदालत ने थाना चौक में दर्ज धोखाधड़ी व अमानत में खयानत के एक मामले में अभियुक्त सागर तानवानी पुत्र नरेश तानवानी निवासी बहादुरगंज मार्ग चौक जनपद मऊ की ओर से प्रस्तुत जमानत प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया।
""अदालत में जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक चंद्र शुक्ल (पूर्व डीजीसी क्रिमिनल) व संजय मिश्र ने किया""
👉 अभियोजन के अनुसार प्रार्थी सैय्यद शवाब हैदर थाना चेतगंज वाराणसी ने थाना चौक में तहरीर दिया कि प्रार्थी अपनी फर्म मेसर्स वेलकम कम्युनिकेशन दालमंडी चौक वाराणसी के नाम से मोबाइल व अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों का होलसेल का व्यापार करता है, विपक्षी सागर तानवानी के सामने वाराणसी जो अपने पिता नरेश तानवानी पुत्र अज्ञात व अपने भाई रोहित तानवानी पुत्र नरेश तानवानी के साथ मिलकर मेसर्स साई इंटरप्राइजेज मऊ नाथ भंजन के नाम से लिक्विडेशन प्रोडक्ट व इलेक्ट्रानिक सामानों के ब्रोकरेज का कार्य करता है ने 31 मार्च 2024 तक विभिन्न तिथियों में 1 करोड़ 34 लाख 63 हजार 9 सौ 32 रुपया का मोबाइल प्रार्थी से उधार क्रय कर लिया, जिसकी जीएसटी बिल प्रार्थी के पास मौजूद है और जोटले मोबाइल प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली को लिक्विडेशन प्रोडक्ट सप्लाई के लिए प्रार्थी के खाते में दो करोड रुपए मंगाकर प्रार्थी के खाते में इंडियन बैंक शाखा चौक वाराणसी से दिनांक 16 अप्रैल 2024 को 10 लाख रुपए तथा अपने दूसरे खाते में इंडियन बैंक शाखा चौक वाराणसी के माध्यम से दिनांक 17 अप्रैल 2024 को 3 लाख 50 हजार रुपये, 18 अप्रैल 2024 को 81 लाख रुपए, दिनांक 19 अप्रैल 2024 को 45 लाख रुपए, दिनांक 21 अप्रैल 2024 को 4 लाख रुपए, 22 अप्रैल 2024 को 20 लाख रुपए यानी कुल 1 करोड़ 63 लाख 50 हजार रुपए प्राप्त कर लिया व शेष रुपया प्रार्थी के बकाए में समायोजित कर लिया। इस प्रकार सागर तानवानी व नरेश तानवानी एवं रोहित तानवानी के जिम्मे में कुल प्रार्थी का 98 लाख 13 हजार 9 सौ 32 रुपए व जोटले मोबाइल प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली द्वारा भेजा गया दो करोड रुपए यानी कुल 2 करोड़ 98 लाख 13 हजार 9 सौ 32 रुपए बकाया हो गया। जिसके भुगतान बाबत जब विपक्षी से प्रार्थी ने अपना बकाया रकम व जोटले मोबाइल के माल का पैसा वापस लेने के बात की तो सभी विपक्षिगण एकजुट होकर नाराज होकर गंदी-गंदी गालियां देते हुए माल व पैसा देने से इनकार कर दिए। तब कुछ मानिंद लोगों के मध्यस्थ से दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ, उक्त समझौता पत्र दिनांक 9 मई 2024 को 100 रुपए के स्टांप पर लिखवाया गया, जिसमें विपक्षीगण ने जल्द से जल्द बकाया रकम देने हेतु दो किता चेक दिनांक 20 मई 2024 का क्रमशः प्रथम चेक एक्सिस बैंक 2 करोड रुपए व द्वितीय चेक एक्सिस बैंक का 98 लाख 13 हजार 9 सौ 32 रुपए का दिया तो प्रार्थी ने दोनों चेक अपने बैंक में दिनांक 20.5.2024 को भुगतान हेतु लगाया तो दिनांक 21.05.2024 को उपरोक्त दोनों चेक खाते में पर्याप्त रकम न होने के कारण अनादृत कर दिया गया। तब उसी दिन प्रार्थी ने विपक्षीगण को बताया कि आपका चेक खाते में अपर्याप्त धनराशि होने के कारण अनादृत कर दिया गया है तो विपक्षीगण ने कहा कि हमने जानबूझकर चेक दिया था और अपना पैसा भूल जाओ अगर ज्यादा परेशान करोगे तो जान से मार कर फेकवा देंगे। प्रार्थी उक्त घटना से अत्यंत हतप्रभ व मर्माहत है। उपरोक्त लोगो ने मिलकर एक फर्जी फर्म बनाकर प्रार्थी को धोखा देते हुए प्रार्थी का बकाया रकम 2 करोड़ 98 लाख 13 हजार 9 सौ 32 रुपया धोखे से हड़प लिया और मांगने पर देने से इनकार करते हुए भद्दी भद्दी गाली व जान से मारने की धमकी भी दिया।
