✍️✍️ एजेंट द्वारा आपराधिक विश्वासघात का मामला, अग्रिम जमानत अर्जी खारिज


वाराणसी: सत्र न्यायालय के न्यायाधीश संजीव पांडेय की अदालत ने थाना चेतगंज में दर्ज जालसाजी व धोखाधड़ी के मामले में अभियुक्त चंचल रस्तोगी पुत्र गणेश प्रसाद रस्तोगी निवासी इंदिरा नगर कॉलोनी भेलूपुर जिला वाराणसी की ओर से प्रस्तुत अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया।

  ""अदालत में जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध जिला शासकीय फौजदारी अधिवक्ता मुनीब सिंह चौहान ने किया""

👉 अभियोजन के अनुसार अभिसूचना संख्याः ई०ओ० डब्लू० अभिसूचना-17/05, दिनाँक 29.10.2005 के सम्बन्ध में मेसर्स बदिका प्लान्टेशन लि० वाराणसी से संबन्धित अभिसूचना संकलित करने का कार्य उप निरीक्षक श्री राजकान्त पाण्डेय द्वारा किया गया। उप निरीक्षक श्री राजकान्त पाण्डेय की जाँच से निम्न तथ्य प्रकाश में आये। मेसर्स बद्रिका प्लान्टेशन लि० के नाम से कम्पनी का पंजीयन दिनांक 06-06-1996 को पटना (बिहार) से कराया गया है जिसका पंजीयन संख्याः 3-07265 है। उक्त कम्पनी की शाखा जनपद वाराणसी में वर्ष 1997 में राजेश राय निवासी म०न०सी 27- 279ए-2. मलदहिया स्टेशन रोड के मकान में खोली गयी जिसमें अपने विभिन्न प्रचार प्रसार माध्यमों से कम समय में ज्यादा ब्याज देने का प्रलोभन देकर आग जनता को प्रोत्साहित करने के साथ उनका धन अपने अभिकर्ता/कार्यकर्ता के माध्यम से जमा कराने लगे जिसमें बंचल रस्तोगी जो कहने के लिये तो कम्पनी का अभिकर्ता था, लेकिन देखा जाय तो कम्पनी की वाराणसी शाखा से सम्बन्धित व्यवसाय यही करता था और एक तरह से कम्पनी के संचालकों द्वारा इसको पूरी जिम्मेदारी दे दी गयी थी और उसी जिम्मेदारी के साथ कम्पनी का काम करता था। इसी परिपेक्ष्य में चंचल रस्तोगी ने शिकायतकर्ता डॉ० असीम गमीरा बुद्धिष्ठ को यह प्रलोभन देकर कि 50 प्रतिशत ब्याज मिलेगा यदि वह 6 लाख रुपया जमा कर देगा तो 25000/- रू० प्रतिमाह उसको व्याज मिलता रहेगा और उसकी वजह से हमको उक्त कम्पनी में स्थायी नौकरी भी मिल जायगी। उक्त बात के लिये बार-बार शिकायतकर्ता को प्रोत्साहित किया तो उसके प्रोत्साहन में आकर डा० अशीम गम्भीरा शिकायतकर्ता ने दिनांक 4.8.1997 को 06 लाख रूपये का एक ब्रेक जो यूनियन बैंक आफ इण्डिया स्टेशन रोड वाराणसी का था जिसका नम्बर 067364 था. चंचल रस्तोगी को दे दिया जिन्त्तके परिप्रेक्ष्य में शिकायतकर्ता को प्रतिभाह 25000/-रू० तीन माह तक बंचल रस्तोगी के माध्यम से पैसा मिला लेकिन जब पैसा मिलना बंद हो गया तब कम्पनी के कार्यालय जाकर पता किया गया तो ज्ञात हुआ कि कार्यालय बंद हो गया है और कार्यकर्ता इसी तरह से बहुत लोगों का पैसा जमा कराये है और उनका पैसा लेकर भाग गये हैं। उसी बीच जब चंचल रस्तोगी से सम्पर्क हुआ तो उन्होंने लिखित आश्वासन भी दिया कि कम्पनी पैसा नाहीं देगी वो हम देंगे लेकिन न तो चंचल रस्तोगी द्वारा और न ही अन्य किसी कार्यकर्ता द्वारा आज तक पैसा वापस किया गया और न ही किये गये वादे के मुताबिक ब्याज की राशि 25000/- रू० प्रतिमाह दिया ही दिया जा रहा है। इसी तरह से निवेशक जो अपना पैसा जमा किये हैं, किसी को न तो ब्याज मिल रहा है और न ही मूलधन। कम्पनी का शाखा कई जगह खोली गयी थी और जगह-2 प्रचार प्रसार का काम अभिकर्ता / कार्यकर्ता के अलावा अन्य माध्यमों से किया जाता था और कम्पनी का व्यवसाय चलाने के लिये हर जगह कम्पनी के निदेशकों द्वारा कर्मचारी नियुक्त किये गये थे जो इस शाखा से सम्बन्धित व्यवसाय करते थे लेकिन कम्पनी के मुख्य संचालक निदेशक/कर्ताधर्ता जिसमें (१) श्री जल्लन कुमार सिंह पुत्र श्री रामदेव सिंह निवासी पंचमहला थाना मोकामा जनपद पटना (विहार) (2) श्री अविनाश कुमार सिंह उर्फ रिंकू पुत्र श्री महेश्वर प्रसाद सिंह निवासी पंथमहला थाना मोकामा जनपद पटना बिहार (3) अरुण कुमार सिंह पुत्र श्री रामदेव सिंह निवासी पंचमहला थाना मोकामा जनपद पटना बिहार (4) अच्यूत कुमार सिंह पुत्र श्री भागीरथ प्रसाद सिंह निवासी वाम पंडारख थाना पंडारख जनपद पटना बिहार (5) श्री शैलेश कुमार पाण्डेय पुत्र श्री दिनेश चन्द्र पाण्डेय निवासी ग्राम कमलचक थाना पीरपैती जनपद देवहार भागलपुर झारखण्ड (5) श्री अमय कुमार सुमन पुत्र श्री हरि नारायण सिंह निवासी ग्राम पोस्ट व थाना बढ़‌हिया जनपद लखीसराय बिहार (7) श्री अमर कुमार सिंह पुत्र श्री अरुण कुमार सिंह निवासी ग्राम बिसुनपुर थाना शम्भूगंज जनपद बांका बिहार (8) बचल रस्तोगी पुत्र श्री गणेश प्रसाद रस्तोगी निवासी बी-27/190 साकुम्भरी काम्प्लेक्स मेलूपुर इन्दानगर कालोनी वितईपुर वाराणसी मुख्य थे, जो कम्पनी के व्यवसाय को चलाते थे और उसके लाभ हानि से प्रभावित थे और इन्हीं लोगों द्वारा वाराणसी में शाखा खोलकर व्यवसाय किया गया और कम समय में ज्यादा ब्याज देने का प्रलोभन देकर लोगों को प्रोत्साहित किये और जब जनता के लोग पैसा जमा किये तो वादा के मुतानिक कुछ माह तक ब्याज भी दिये लेकिन जब लोगों को विश्वास हो गया और काफी पैसा जमा हो गया तो इनकी नियत खराब हो गयी और अचानक कार्यालय बंद कर दिये और लोगों का पैसा जो घोखा देकर जमा कराये थे, हडप कर भाग गये।

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