""बचाव पक्ष की ओर से अदालत में अधिवक्ता प्रवीण कुमार मिश्रा व बबलू यादव ने पक्ष रखा""
👉 अभियुक्त के विद्वान अधिवक्ता द्वारा अदालत में तर्क दिया गया कि अभियुक्त निर्दोष है उसने कोई जुर्म कारित नहीं किया है। वादी मुकदमा लहरतारा पर खड़े पुलिस द्वारा अभियुक्त से अवैध धन की मांग करने व प्रार्थी अभियुक्त द्वारा अवैध धन की अदायगी न करने की वजह से उसके पास कछुआ की बरामदगी दिखाई गई है, जबकि बरामदगी कछुए अभियुक्त के पास से बरामदशुदा नहीं हुए हैं और न ही बरामदशुदा कछुए से उसका कोई लेना देना है फर्द बरामदगी में बरामद की स्थान पर मौके पर उपस्थित स्वतंत्र गवाहन की उपस्थिति होने से इनकार करने और स्वतंत्र गवाह का हस्ताक्षर नहीं है और न ही हस्ताक्षर न होने का स्पष्टीकरण दिया गया है। अवैध धन की मांग पुलिस पार्टी द्वारा लखनऊ का निवासी होने की वजह से किया गया है।
👉 प्रकरण के अनुसार मुखबिर से सूचना के आधार पर मंडुवाडीह पुलिस ने दिनांक 18 जनवरी 2025 को लखनऊ निवासी एक युवक को गिरफ्तार किया था। यहां से कछुए ले जाकर रांची में बेचता की इसके पहले ही पुलिस के हत्थे चढ़ गया। व्यक्ति को दो बैग में 430 कछुआ के साथ गिरफ्तार किया। बरामद कछुओं को आरोपी रांची ले जा रहा था। आरोपी की पहचान लखनऊ के बख्तियार नगर निवासी रबिंद्र कुमार उर्फ रवन के रूप में हुई। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अपने गांव के आसपास के तालाब और पोखरी से कछुआ पकड़कर अपने घर में रखता है। जब कछुआ ठीक-ठाक संख्या में हो जाते हैं तो उन्हें रांची ले जाकर बेच देता है। कछुआ बेचने के काम में उसे तगड़ा पैसा मिल जाता है। उसने कहा कि वह लखनऊ के आलमबाग बस अड्डा से वाराणसी आया था। यहां से वह रांची जाने के लिए बस का इंतजार कर रहा था कि पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
