✍️✍️ BHU के तीन कर्मचारी एस.सी/एस.टी एक्ट व लज्जा भंग से दोषमुक्त

 

वाराणसी: विशेष न्यायालय (एस.सी/एस.टी एक्ट) के न्यायाधीश देवकांत शुक्ला कि अदालत ने थाना लंका में दर्ज एस.सी/एस.टी एक्ट के एक मामले में आरोपीगण श्याम कार्तिक सिंह निवासी ग्राम चौहानपुर रिशिपुर थाना जंसा को धारा 354,504 आईपीसी व 3(1)(X) अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम तथा खरपत्तु राम निवासी ग्राम माधेपुर थाना रोहनिया व अखिलेश कुमार सिंह निवासी सुंदर बगिया, बीएचयू थाना लंका को धारा 504 आईपीसी के आरोप से संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। 

""अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता श्याम सुंदर चौरसिया ने पक्ष रखा""

👉 अभियोजन पक्ष के अनुसार परिवादिनी निशा देवी ने न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वाराणसी में धारा 156 (3) दं०प्र०सं० के अन्तर्गत प्रार्थनापत्र विपक्षी संख्या-1 मोती चन्द्र प्रसाद, विपक्षी संख्या-2 श्याम कार्तिक सिंह, चालक व विपक्षी संख्या-3 आर सी यादव चालक, विपक्षी संख्या-4 अखिलेश कुमार सिंह सफाई वाला, विपक्षी संख्या-5 खरपत्तू राम कार्यवाहक सुपरवाइजर व विपक्षी संख्या 6 राणा गोपाल प्रोफेसर इंचार्ज के विरूद्ध इस आशय का प्रार्थना प्रस्तुत किया कि यह सहायक कुलसचिव विपक्षी संख्या 1 के अधीन सफाई वाली के पद पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय मे कार्यरत है तथा वह अनुसूचित जाति की महिला है। विपक्षी संख्या-1 ता 6 उसके विभाग के अधिकारी व कर्मचारी है और सभी विपक्षीगण का एक गोल है। दिनांक 20.01.2014 को समय करीब 2.55 बजे सांय जब वह रवानगी की हाजिरी देने के लिए आई एम एस जाने को तैयार हुयी थी तो उसी समय विपक्षीगण 1 ता 4 एकराय व गोल होकर उसके कार्य स्थल स्वस्ती कुंज महिला छात्रावास महिला महाविद्यालय आये। सभी विपक्षीगण उसके कार्यस्थल स्वस्ती कुंज महिला छात्रावास आकर उसके द्वारा किए गये कार्यों को दिखाने हेतु उससे कहा। जब वह विपक्षीगण को अपने द्वारा किए गये कार्यों को दिखा रही थी तो टायलेट के पास उसको अकेला पाकर विपक्षी संख्या-2 श्याम कार्तिक उसके साथ छेड़खानी करने लगा और छेड़खानी करते हुए विपक्षी संख्या -2 उसको टायलेट की ओर जोर से धक्का मारा। धक्का मारने से वह किसी तरह गिरने से बची और अपने को संभालते हुए विरोध किया। विरोध करने पर विपक्षी संख्या 2 उसको गाली देने लगा और कहा कि ज्यादा बोलेगी तो अच्छा नहीं होगा। उसको विपक्षी संख्या-2 ने गालियां देते हुए जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि तुम भंगीन (सफाई वाली) नीच हो और भंगिन की तरह रहो। मैं ठाकुर हूँ और प्रोफेसर इंचार्ज व कुलपति भी ठाकुर है और सभी हमारे रिस्तेदार है जो चाहूँगा वही होगा, मैं जो चाहूँगा वहीं करूँगा नहीं तो मुझे कोई रोक सकता है और न ही मेरा कोई कुछ बिगाड़ सकता है। परिवादिनी ने विपक्षी संख्या 2 के हरकतों की शिकायत पास में खड़े अन्य विपक्षीगण से किया तो सभी विपक्षीगण अपने सहयोगी विपक्षी संख्या-2 का पक्ष लेते हुए उसको डाटने लगे और उसको गाली गुप्ता अशोभनीय व्यवहार तथा जातिसूचक शब्दो का प्रयोग करने लगे और उसको धमकी दिये कि विपक्षी संख्या-2 ठाकुर हैं जो कहता है वह करो और ज्यादा बोलेगी तथा चिल्लाओगी तो हम सभी लोग तुम्हे कहीं का नहीं छोड़ेंगे और जब चाहेंगे तुम्हे काम से निकाल देंगे और तुम मेरा कुछ नहीं कर सकती हो। सभी विपक्षीगण एक राय गोल होकर परिवादिनी के अलावा अन्य महिला कर्मचारियों के साथ छेडखानी व अभद्रता तथा अश्लील हरकत कर चुके है। लेकिन विभाग में शिकायत करने पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। परिवादिनी ने इसकी लिखित शिकायत कुलपति महोदय बी.एच.यू. वाराणसी को तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारीगण को दिया लेकिन विपक्षीगण के विरूद्ध कोई विभागीय कार्यवाही नहीं हुआ। विभागीय कार्यवाही न होने से सभी विपक्षीगण का हौंसला काफी बुलन्द हो गया है और लगभग प्रत्येक दिन सभी विपक्षीगण उसको बोली आवाज छेड़खानी तथा अभद्रता का व्यवहार करते चले आ रहे हैं और विभाग द्वारा विपक्षीगण के विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही न होने से दिनांक 15.09.2014 को सभी विपक्षीगण परिवादिनी को गाली गुप्ता व जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए जान से मारने की धमकी दिये हैं, वह विपक्षीगण की धमकियों से काफी भयभीत है।

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