वाराणसी: सत्र न्यायालय वाराणसी के न्यायाधीश जय प्रकाश तिवारी ने भेलूपुर थाना क्षेत्र में दर्ज एक बहुचर्चित धोखाधड़ी के मामले में संगम बिहार कॉलोनी, प्रयागराज निवासी अभियुक्ता मनोरमा सिंह और गाजीपुर निवासी अभियुक्त गणेश बरनवाल की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।
""अदालत में अभियोजन की ओर से जिला शासकीय फौजदारी अधिवक्ता मुनीब सिंह चौहान ने जोरदार विरोध किया""
👉 मामले की शुरुआत राजकुमार सिंह चौहान की शिकायत से हुई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें एक फर्जी निवेश योजना में करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। वादी के अनुसार, आरोपी गणेश बरनवाल और अन्य ने उन्हें एक कंपनी Aad Ecommerce And Solution Limited के नाम पर निवेश का झांसा देकर मोटे मुनाफे का लालच दिया। यह दावा किया गया था कि कंपनी भारत सरकार और Financial Intelligence Unit India (FIU-IND) से मान्यता प्राप्त है।
राजकुमार सिंह ने विश्वास कर अपने, अपने पिता, पत्नी और बहन के नाम से कुल 8 लाख से अधिक की राशि कंपनी में निवेश की। रिटर्न के नाम पर उन्हें करीब 16 लाख रुपये का वादा किया गया था। लेकिन समय पर कोई भुगतान नहीं मिला, और जब पीड़ित ने पूछताछ की, तो आरोपियों ने उन्हें गालियाँ दीं और जान से मारने की धमकी तक दी।
जांच में सामने आया कि कंपनी के दस्तावेज और FIU-IND का प्रमाणपत्र पूरी तरह से फर्जी और कूटरचित थे। अभियोजन के अनुसार, यह एक सुनियोजित वित्तीय धोखाधड़ी है, जिसमें आम लोगों को निशाना बनाया गया।
अदालत ने प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानते हुए यह पाया कि आरोपियों को अग्रिम जमानत देने से न्याय में बाधा उत्पन्न हो सकती है और इसी आधार पर याचिका को खारिज कर दिया गया।
