✍️✍️ मानसिक चिकित्सक के खिलाफ अर्जी कोर्ट ने की खारिज

 

वाराणसीमानसिक चिकित्सालय में भर्ती मरीज की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु के मामले में दाखिल प्रार्थना पत्र को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार की अदालत ने खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पत्रावली में ऐसा कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, जिससे यह सिद्ध हो कि मानसिक चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. अरविंद कुमार सिंह ने कोई लापरवाही बरती हो।

 ""चिकित्सक की ओर से अधिवक्ता राहुल श्रीवास्तव ने पक्ष रखा और दस्तावेजों के आधार पर आरोपों का खंडन किया""

👉 प्रार्थी अनिल कुमार ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएनएस) की धारा 173(4) के तहत अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल करते हुए आरोप लगाया था कि उसके भाई आलोक कुमार को 29 मई 2023 को पांडेयपुर स्थित मानसिक चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। उसका इलाज डॉ. अरविंद कुमार सिंह एवं अन्य कर्मचारियों की देखरेख में चल रहा था। लेकिन 9 जून 2023 को उसकी मृत्यु हो गई, जिसकी सूचना उसे लगभग 15 घंटे बाद दी गई। जब वह अस्पताल पहुंचा तो शव से दुर्गंध आ रही थी, जबकि सभी मेडिकल रिपोर्ट सामान्य थीं। उसे शंका थी कि मृत्यु चिकित्सकीय लापरवाही का परिणाम है।

इस मामले में अनिल कुमार ने कैंट थाने और अन्य उच्च पुलिस अधिकारियों से शिकायत की थी, परन्तु जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

मगर अदालत ने यह कहते हुए प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया कि केवल शंका और संभावनाओं के आधार पर विवेचना का आदेश नहीं दिया जा सकता।

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