✍️✍️ ASP के विरुद्ध वाराणसी न्यायालय में परिवाद दर्ज, लगाए गए कई गंभीर आरोप

 

""मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में धारा 223 बीएनएसएस के तहत दर्ज हुआ मामला""

वाराणसी —  थाना शिवपुर क्षेत्र निवासी मनीष कुमार श्रीवास्तव द्वारा दायर एक प्रकीर्ण प्रार्थना पत्र को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार द्वितीय की अदालत ने परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया है। दिनांक 04 अगस्त 2025 को अदालत ने पत्रावली वास्ते बयान अंतर्गत धारा 223 बी.एन.एस.एस. के लिए निर्धारित किया । इस मामले में प्रार्थी की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी ने प्रभावी पैरवी की।


गंभीर आरोपों से घिरे एएसपी लखन सिंह यादव

👉 प्रार्थी मनीष कुमार श्रीवास्तव ने अपने परिवाद में एएसपी (सहायक पुलिस आयुक्त) लखन सिंह यादव पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। मनीष के अनुसार, उनका पुलिस विभाग से पूर्व से ही विवाद चला आ रहा है, जिसकी जानकारी उन्होंने समय-समय पर संबंधित अधिकारियों को दी, किन्तु पुलिस विभाग में पदस्थ होने के कारण विपक्षियों के विरुद्ध कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई।

👉 प्रार्थी ने आरोप लगाया है कि 24 अप्रैल 2022 को उनके छोटे भाई शुभम श्रीवास्तव की पत्नी अंकिता श्रीवास्तव ने आत्महत्या कर ली थी। इस घटना की सूचना उन्होंने स्वयं तत्काल पुलिस, आयुक्त और मृतका के परिजनों को दी थी, किंतु एएसपी लखन सिंह यादव द्वारा दर्ज प्राथमिकी (मु.अ.सं. 143/22) में इसका कोई उल्लेख नहीं किया गया।


साक्ष्य छिपाने और जबरन गिरफ्तारी के भी आरोप

👉 प्रार्थी ने यह भी बताया कि उन्होंने घटना स्थल की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अपने मोबाइल से की थी, जिसे कथित तौर पर एएसपी यादव द्वारा बलपूर्वक छीन लिया गया। इसके अतिरिक्त, मृतका के बिस्तर के नीचे से एक सुसाइड नोट मिलने की जानकारी भी उन्होंने दी, जो प्राथमिकी में अंकित नहीं किया गया। उन्होंने इसे साक्ष्य छिपाने और द्वेषपूर्वक कार्रवाई का मामला बताया।

👉 प्रार्थी का यह भी कहना है कि घटना के पश्चात उन्हें थाना शिवपुर लाया गया, जहां उनसे जबरन हस्ताक्षर करवाकर, दबाव बनाकर, उनके ऊपर झूठा मुकदमा दर्ज कर लिया गया। जबकि घटनास्थल पर उनके हस्ताक्षर पंचनामा और पोस्टमार्टम कागजात में पहले ही अंकित थे।


न्यायालय से की गई मांग

👉 प्रार्थी ने यह दावा किया है कि एएसपी यादव ने न केवल विवेचना में गंभीर प्रशासनिक शिथिलता दिखाई, बल्कि उनके मौलिक अधिकारों का हनन भी किया है। उन्होंने अदालत से मांग की है कि एएसपी लखन सिंह यादव को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 352 (मारपीट), 201 (साक्ष्य मिटाना), 120B (षड्यंत्र), 504 (अपमान), 506 (आपराधिक धमकी) व पुलिस एक्ट की धारा 29 के तहत तलब कर दंडित किया जाए।


पुलिस विभाग पर पूर्वाग्रह से कार्रवाई का आरोप

👉 प्रार्थी के अनुसार, पूर्व में थाना शिवपुर के तत्कालीन एसओ पुनीत परिहार व अन्य के विरुद्ध उनके द्वारा दायर याचिकाएं न्यायालय में विचाराधीन हैं। इसीलिए, पुलिस विभाग उनके विरुद्ध पूर्वाग्रह से कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि 24 अप्रैल 2022 को उनके लाल रंग के पर्स, ₹200 नकद, आवश्यक कागजात तथा विजिटिंग कार्ड भी जब्त कर लिए गए थे, जिन्हें आज तक रिलीज नहीं किया गया है।


सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मिली भ्रामक सूचना

👉 मनीष श्रीवास्तव ने आगे बताया कि उन्होंने 31 मई 2024 को पुलिस आयुक्त कार्यालय से सूचना अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी, जिस पर उन्हें भ्रामक और असत्य जानकारी दी गई। इसको लेकर उन्होंने 26 जुलाई 2024 को शिकायत दर्ज कराई और कहा कि यह उनका अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

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