✍️✍️ वाहन चोरी मामले में अभियुक्त को कोर्ट से मिली राहत, बाद में जोड़ी गई धाराओं में भी जमानत मंजूर


वाराणसीविशेष न्यायालय (एससी/एसटी एक्ट) के न्यायाधीश देवकांत शुक्ला की अदालत ने थाना चोलापुर में दर्ज बीएनएस की धाराएं 318(4), 338, 336(3) से जुड़े मामले में अभियुक्त अजय विश्वकर्मा उर्फ अजय कुमार विश्वकर्मा की जमानत अर्जी को स्वीकार करते हुए उसे रिहा करने का आदेश दिया है।

""अदालत में अभियुक्त की ओर से फौजदारी अधिवक्ता विकास यादव व विवेक सिंह सोलंकी ने पक्ष रखा और जमानत के पक्ष में सशक्त तर्क प्रस्तुत किए।""


मामला संक्षेप में:

👉 वादी राजकुमार सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी मोटरसाइकिल (UP 65 CN 1878), जो उसके पुत्र दिलीप कुमार के नाम पर पंजीकृत है, 5 मई 2025 को मोहाँव बैराजित से चोरी हो गई। पुलिस जांच के दौरान मुखबिर की सूचना पर देईपुर-गडसरा लिंक रोड पर तीन संदिग्धों को रोका गया। दो व्यक्ति मौके से भाग निकले जबकि तीसरे व्यक्ति को पकड़ लिया गया, जिसने अपना नाम अजय विश्वकर्मा बताया। उससे पूछताछ में 150 रुपये और चोरी की मोटरसाइकिल मिली।

👉 बाद में अभियुक्त की निशानदेही पर 10 और मोटरसाइकिलें बरामद की गईं। अभियोजन के अनुसार ये वाहन चोरी के थे, जबकि बचाव पक्ष ने दावा किया कि ये बाइकें अभियुक्त की मरम्मत की दुकान से बरामद की गई थीं, जहां वे वाहन स्वामियों द्वारा मरम्मत के लिए दी गई थीं।


बचाव पक्ष के तर्क:

👉 बचाव पक्ष ने बताया कि अभियुक्त अजय विश्वकर्मा एक विकलांग व्यक्ति है और धरसौना नहर के पास मोटरसाइकिल मरम्मत की दुकान चलाता है। पूर्व में उसे इसी मामले में दर्ज धाराओं 303(2), 317(2), 317(4), 317(5) बीएनएस में 30 जून 2025 को जमानत मिल चुकी थी।

👉 बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि विवेचक ने दुर्भावना से प्रेरित होकर बाद में जानबूझकर धाराएं बढ़ाईं और अभियुक्त को दोबारा गिरफ्तार करने का प्रयास किया। साथ ही, बरामद मोटरसाइकिलों की स्थिति (जैसे इंजन व पहिए की कमी और चेसिस नंबर अस्पष्ट होना) स्पष्ट करती है कि वे मरम्मत की स्थिति में थीं न कि चोरी की गई थीं।

👉 इसके अलावा, कई वाहन स्वामियों ने शपथपत्र देकर यह भी कहा कि उन्होंने बाइकें मरम्मत हेतु दी थीं।


न्यायालय का निर्णय:

👉 अदालत ने इन तथ्यों और दलीलों को ध्यान में रखते हुए अभियुक्त को बाद में जोड़ी गई धाराओं में भी जमानत प्रदान कर दी। 

👉 बचाव पक्ष का यह भी कहना है कि अभियुक्त न सिर्फ निर्दोष है, बल्कि पुलिस द्वारा उसे अनावश्यक रूप से परेशान किया गया है। न्यायालय के आदेश से अभियुक्त को राहत मिली है, और मामले में आगे की सुनवाई जारी रहेगी।

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