✍️✍️ महिला शिक्षक के यौन उत्पीड़न मामले में विवेचक पर लापरवाही का आरोप, न्यायालय ने पुलिस आयुक्त को सख्त जांच के दिए आदेश

 

वाराणसी -मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, वाराणसी ने इस पूरे प्रकरण में विवेचक की भूमिका पर प्रश्नचिन्ह उठाते हुए पुलिस आयुक्त, वाराणसी को निर्देशित किया है कि अभय सिंह परिहार की विभागीय जांच कर 15 दिन के भीतर आख्या न्यायालय को प्रस्तुत की जाए। 

""अदालत में इस मामले की पैरवी फौजदारी अधिवक्ता जयदीप चक्रवर्ती ने की""

👉 सिगरा में स्थित एक नामचीन स्कूल में कार्यरत एक महिला शिक्षिका द्वारा डीन पर यौन उत्पीड़न, अश्लील टिप्पणी व जबरन मोबाइल छीनने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पीड़िता के अनुसार, दिनांक 27 मई 2025 को विद्यालय में कार्य समाप्ति के पश्चात अपने पति को फोन करने के दौरान आरोपी डीन कक्ष में आया और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए मोबाइल छीन लिया। इसके बाद डीन द्वारा रात को फ्लैट पर बुलाने की आपत्तिजनक बात कही गई।

👉 घटना की सूचना देने पर पीड़िता के पति ने विद्यालय प्रिंसिपल से मिलकर शिकायत की, जिसके बाद डीन को जानकारी होते ही पीड़िता को उसी दिन शाम 4:30 बजे निष्कासित कर दिया गया। पीड़िता ने बताया कि न तो कोई पूर्व सूचना दी गई थी और न ही निष्कासन से पूर्व कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।

👉 पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि डीन द्वारा पूर्व में भी महिला शिक्षिकाओं पर यौन संबंध बनाने का दबाव बनाया जाता रहा है, और विरोध करने पर उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाता है। इन सभी आरोपों के पीछे प्रिंसिपल की संलिप्तता भी बताई गई है।

👉 हालांकि, इतने गंभीर आरोपों के बावजूद विवेचक अभय सिंह परिहार द्वारा न तो पीड़िता का 183 बीएनएस के अंतर्गत मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराया गया और महज सात दिन के भीतर अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी गई। इससे न्यायालय ने गहरी नाराजगी जताई है और इसे ‘संदिग्ध, संवेदनहीन एवं विधि मानकों के प्रतिकूल’ बताया है।

Post a Comment

Previous Post Next Post