👉 ""यह प्रार्थना पत्र समिति के वर्तमान कार्यवाहक सचिव नीरज कुमार जोशी की ओर से उनके अधिवक्ताओं महेंद्र मोहन मिश्र, अभय अग्निहोत्री और विकास पाठक द्वारा दाखिल किया गया था""
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गबन का आरोपित: वरिष्ठ सहायक शिवशंकर
👉 प्राप्त विवरण के अनुसार, गबन का मुख्य आरोपी शिवशंकर पुत्र रामनंदन है, जो पूर्व में वरिष्ठ सहायक के पद पर समिति में कार्यरत थे और वर्तमान में पदच्युत हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने लगभग 15 वर्षों तक समिति के वित्तीय अभिलेखों और खातों में अनियमितताएं करते हुए करोड़ों की हेराफेरी की।
👉 शिवशंकर पर यह भी आरोप है कि उन्होंने समिति के पूर्व अध्यक्ष ओमप्रकाश यादव और उनकी पत्नी प्रमिला यादव के नाम पर काल्पनिक ऋण जारी किया और बिना शेयर जमा किए हुए फर्जी चेक हस्ताक्षर कर धनराशि उनके संयुक्त बैंक खाते में स्थानांतरित की।
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दस्तावेजों की हेराफेरी और प्रमाण पत्र में धोखाधड़ी
👉 पूर्व सचिव काली प्रसाद के नाम पर ₹11,27,903 के बकाया ऋण की जानकारी होते हुए भी शिवशंकर ने उन्हें अदेय प्रमाण पत्र जारी कर दिया। इसके अलावा उन्होंने समिति की एफडीआर, बैंक स्टेटमेंट, वार्षिक लाभांश की फाइलें, पिछले 10 वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट, तथा महत्वपूर्ण लेखा अभिलेखों को छिपाया या गायब किया।
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करोड़ों की हेराफेरी का विस्तृत लेखा-जोखा
👉विभिन्न वर्षों में किए गए वित्तीय लेन-देन, चेकों के माध्यम से निकासी, फर्जी ब्याज पोस्टिंग, और मनमाने ढंग से खातों से पैसे ट्रांसफर करने के माध्यम से शिवशंकर द्वारा ₹1,92,24,251/- (एक करोड़ बानवे लाख चौबीस हजार दो सौ इक्यावन रुपये) की हेराफेरी की गई।
👉 इस पूरे प्रकरण में पूर्व निष्कासित सचिव शंकर प्रसाद विश्वकर्मा का भी सहयोग बताया गया है। विभागीय जांच रिपोर्ट दिनांक 02.11.2023 में इस गबन की पुष्टि की गई है, लेकिन आरोपी द्वारा अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया है।
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पहले दी गई शिकायत पर नहीं हुई कार्रवाई
👉 पूर्व सचिव अशोक कुमार ने दिनांक 14.11.2024 को पुलिस आयुक्त, पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से शिकायत भेजी थी। लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे प्रकरण न्यायालय तक पहुंचा।
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अदालत ने माना मामला गंभीर, दिए FIR और जांच के निर्देश
👉 न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों को गंभीर मानते हुए आदेश दिया कि थाना लंका की पुलिस घटना की विवेचना उपयुक्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कर तत्काल शुरू करे।
